एआई संप्रभुता मानवाधिकारों से ऊपर नहीं हो सकती

विश्व कांग्रेस में सीसीएसयू के प्रोफेसर आशीष कौशिक ने रखे विचार, एआई के इस्तेमाल में मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर दिया जोर

मेरठ। इंटरडिसिप्लिनरी स्कूल ऑफ फंडामेंटल राइट्स प्रैइमिनेंटिया जस्टिटिया (पेरू) और यूनिवर्सिटी ऑफ काशियास दो सुल (ब्राजील) की ओर से आयोजित विश्व कांग्रेस में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के लीगल स्टडीज संस्थान के प्रोफेसर आशीष कौशिक ने एआई संप्रभुता और मानवाधिकारों के बीच बढ़ते कानूनी टकराव पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और संप्रभु कंप्यूट क्षमता राज्यों के वैध अधिकार हैं, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता को मानवाधिकार दायित्वों से बचने के लिए ढाल नहीं बनाया जा सकता।

प्रो. कौशिक ने अनियंत्रित एआई नीतियों से व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख करते हुए बड़े पैमाने पर एल्गोरिथम निगरानी और डिजिटल सेंसरशिप के खतरे बताए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनी मिसालों का हवाला देते हुए कहा कि बिना प्रभावी न्यायिक समीक्षा वाली राज्य निगरानी और अंधाधुंध डेटा इंटरसेप्शन आनुपातिकता की कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते।

उन्होंने एआई और मानवाधिकारों के बीच संतुलन के लिए तीन प्रमुख सुरक्षा उपाय सुझाए। इनमें सार्वजनिक प्रशासन में उच्च जोखिम वाले एआई के इस्तेमाल से पहले स्वतंत्र मौलिक अधिकार प्रभाव आकलन, स्वचालित निर्णयों के खिलाफ स्पष्ट कारण और स्वतंत्र न्यायिक उपाय तथा बाध्यकारी बहुपक्षीय एआई मानकों को अपनाना शामिल है।

प्रोफेसर कौशिक ने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता तभी कानूनी वैधता हासिल कर सकती है, जब वह व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करे और कानून के शासन के तहत मानव स्वतंत्रता के सार्वभौमिक उद्देश्य को कायम रखे।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts