तीन लाख की रिश्वत के आरोपी डा. सतीश शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत

सीबीआई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट, करीब साढ़े तीन महीने बाद डासना जेल से रिहाई

मेरठ। गांधी बाग के राजस्व ठेके से जुड़े तीन लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में जेल में बंद कैंट बोर्ड के पूर्व मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। सोमवार को जमानत आदेश हाईकोर्ट के पोर्टल पर अपलोड होने के बाद देर शाम उन्हें गाजियाबाद की डासना जेल से रिहा कर दिया गया। डा. सतीश शर्मा करीब साढ़े तीन महीने से जेल में बंद थे।

शुक्रवार को हुई थी सुनवाई, सोमवार को अपलोड हुआ आदेश

डा. सतीश शर्मा की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को हाईकोर्ट के पोर्टल पर जमानत संबंधी आदेश अपलोड किया गया। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें डासना जेल से रिहा कर दिया गया।

30 मई को तीन लाख रुपये के साथ पकड़ा था

गांधी बाग के राजस्व ठेके को लेकर ठेकेदार विक्की कश्यप ने शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई की गाजियाबाद शाखा ने कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया था। 30 मई को सीबीआई टीम ने डा. सतीश शर्मा को उनके अंसल टाउन स्थित आवास से तीन लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था।

सीबीआई का आरोप था कि यह रकम ठेकेदार से रिश्वत के तौर पर ली गई थी। गिरफ्तारी के बाद डा. सतीश शर्मा को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया था।

पांच अगस्त को सीबीआई कोर्ट ने खारिज की थी जमानत

गिरफ्तारी के बाद डा. सतीश शर्मा ने सीबीआई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। पांच अगस्त को अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद अब उन्हें जमानत मिल गई है।

गिरफ्तारी के बाद चली गई थी कैंट बोर्ड की सदस्यता

सीबीआई की ओर से गिरफ्तारी की सूचना कैंट बोर्ड मेरठ को मिलने के बाद मामले से बोर्ड अध्यक्ष एवं स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह को अवगत कराया गया था। इसके बाद कैंट एक्ट की धारा 34 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में रक्षा मंत्रालय ने डा. सतीश शर्मा की कैंट बोर्ड की मनोनीत सदस्यता समाप्त कर दी थी।

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