महंगाई नियंत्रण जरूरी
इलमा अज़ीम
इन दिनों महंगाई बेलगाम हो रही है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2026 में भारतीय बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मौसम की अनिश्चितता और फसल प्रभावित होने से चीनी के खुदरा भाव ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। सीमित आपूर्ति के कारण प्याज के दाम पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़े हैं। इसके अलावा सरसों तेल, रिफाइंड तेल और दालों के दाम भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। त्योहारों के मौसम में मांग बढऩे, चारे की लागत और परिवहन खर्च में वृद्धि के कारण दूध, मिठाइयों, पैकबंद खाद्य पदार्थों और पैक्ड चाय की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
यह परिदृश्य स्पष्ट संकेत देता है कि कमजोर मानसून और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में आम नागरिक के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में जुलाई महीने में खुदरा महंगाई दर बढक़र 4.45 प्रतिशत हो गई है, जो जून में 4.38 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है।
महंगाई में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें हैं। निश्चित रूप से खाद्य वस्तुओं की बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी की थाली महंगी हो गई है। जीवन निर्वाह लागत बढ़ गई है। महंगाई नियंत्रण के लिए सरकार को और अधिक नए रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ना होगा। सरकारी गोदामों से गेहूं, चावल और दालों को उपयुक्त रूप से खुले बाजार में जारी किया जाना होगा, ताकि आगामी त्योहारी सीजन में आपूर्ति बनी रहे।
प्याज, टमाटर और आलू की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए नाफेड जैसे सरकारी संगठनों के माध्यम से उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर सीधी बिक्री बढ़ाई जानी होगी। आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों के स्टॉक सीमाओं की सख्त निगरानी आवश्यक होगी। खाद्य तेलों और दालों की उपलब्धता सुधारने हेतु आयात शुल्क में अस्थायी कटौती की जानी होगी। महंगाई में पिस रहे गरीब लोगों को राहत देनी होगी।





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