नहीं रहे ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया, 284 बार चुनाव लड़कर बनाया अनोखा रिकॉर्ड; ग्राम पंचायत से राष्ट्रपति चुनाव तक आजमाई किस्मत

लाहौर में जन्मे नागरमल आजादी से पहले भागलपुर आ बसे थे, 97 साल की उम्र में पटना में इलाज के दौरान निधन

भागलपुर, 3 सितंबर 2026।
284 बार चुनाव लड़ने के लिए देशभर में ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर भागलपुर के समाजसेवी नागरमल बाजोरिया का गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। चुनावी राजनीति में उनका सफर ग्राम पंचायत से शुरू होकर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा तक पहुंचा। उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी कई बार अपनी किस्मत आजमाई, हालांकि अधिकांश चुनावों में उन्हें जीत नहीं मिली।

लाहौर में हुआ था जन्म, आजादी से पहले भागलपुर आए

नागरमल बाजोरिया का जन्म तत्कालीन अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ था। उनके परिवार ने देश की आजादी से पहले ही भागलपुर को अपना ठिकाना बना लिया था। इसके बाद उन्होंने भागलपुर को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया और सामाजिक गतिविधियों के साथ लगातार चुनाव लड़ते रहे।

ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों के अनुसार, बाजोरिया ने अपने जीवन में 284 चुनाव लड़े थे। उनके चुनावी सफर में स्थानीय निकाय से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों के चुनाव तक शामिल रहे।

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के खिलाफ भी उतरे मैदान में

‘धरती पकड़’ के नाम से प्रसिद्ध नागरमल बाजोरिया ने बड़े नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ने से भी परहेज नहीं किया। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ चुके थे।

वर्ष 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ भी नामांकन किया था। बताया जाता है कि राष्ट्रपति चुनाव में एक बार उन्हें इतने वोट मिले थे कि उनकी जमानत राशि तक वापस हो गई थी।

राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में 17 बार आजमाई किस्मत

नागरमल बाजोरिया ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में कुल 17 बार हिस्सा लिया। चुनाव जीतने में सफलता भले ही नहीं मिली, लेकिन बार-बार चुनाव मैदान में उतरने के कारण उनकी अलग पहचान बन गई।

हालांकि, उनके चुनावी रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग लोगों द्वारा 281 से 284 तक की संख्या बताई जाती रही है। उनके करीबियों और चुनावी सफर से जुड़े लोगों के मुताबिक कुल संख्या 284 तक पहुंचती है।

नगरपालिका चुनाव जीतने का भी किया था दावा

नागरमल बाजोरिया के चुनावी सफर का एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि उन्होंने खुद दावा किया था कि करीब 30 वर्ष की उम्र में वह भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीत चुके थे। बाद में उन्होंने पार्षद का पद छोड़ दिया था।

इसलिए उनके बारे में यह कहना कि उन्होंने जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं जीता, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।

गधों के साथ प्रचार और तांगे ने दिलाई अलग पहचान

‘धरती पकड़’ सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए ही चर्चित नहीं थे, बल्कि उनका चुनाव प्रचार भी बेहद अनोखा होता था। वह कई बार प्रचार के दौरान गधों को साथ लेकर निकलते और तांगे पर सवार होकर लोगों के बीच पहुंचते थे।

उनके इस अनोखे अंदाज की वजह से चुनाव के दौरान वह स्थानीय स्तर पर खूब चर्चा में रहते थे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भी वह सार्वजनिक रूप से राजनीतिक गतिविधियों में नजर आए और बाद में फिर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरते रहे।

समाजसेवा में भी सक्रिय रहे

नागरमल बाजोरिया का जीवन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं था। वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। लोगों के अनुसार उन्होंने गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग किया, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में मदद की और जरूरत वाले इलाकों में चापाकल लगवाने जैसे काम किए।

उन्होंने गौवध के खिलाफ भी अभियान चलाया था। भागलपुर के सामाजिक और व्यवसायी संगठनों से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा।

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