16,726 भवनों पर सीलिंग का संकट, पूरे मेरठ में सर्वे की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मेडा जोन बी, सी और डी में भी करेगा अवैध निर्माणों की पड़ताल; शास्त्रीनगर के प्रभावितों को राहत की उम्मीद
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मेरठ में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ने लगा है। जोन-ए में चिन्हित 16,726 भवनों पर कार्रवाई के आदेश के बाद अब मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) जोन-बी, सी और डी में भी सर्वे की तैयारी कर रहा है। चारों जोन में करीब 4.75 लाख भवन बताए जा रहे हैं। ऐसे में हजारों भवन स्वामियों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने जोन-ए में चिन्हित 16,726 संपत्तियों के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने बाकी तीन जोन में भी अवैध निर्माण और नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों वाली संपत्तियों की पहचान कर अगली स्टेटस रिपोर्ट में जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को निर्धारित है।
चारों जोन में होगी पड़ताल
मेडा ने पहले जोन-ए में सर्वे कराया था। इस सर्वे में 16,726 निर्माण चिन्हित किए गए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इनमें 12,907 रिहायशी, 874 रिहायशी एवं व्यावसायिक और 2,945 गैर-रिहायशी निर्माण शामिल हैं। अब अदालत के निर्देश के बाद जोन-बी, सी और डी में भी इसी तरह के निर्माणों की पहचान की तैयारी है।
जोन-ए में दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, बिजली बंबा बाईपास, परतापुर, लिसाड़ीगेट, माधवपुरम, ब्रह्मपुरी, बेगमपुल और आसपास के कई क्षेत्र शामिल हैं। वहीं जोन-बी में मवाना रोड, गंगानगर, रुड़की रोड, उल्देपुर, लावड़, पल्लवपुरम और दौराला की तरफ के इलाके आते हैं।
जोन-सी में रोहटा रोड, बागपत रोड, खड़ौली, मलियाना और आसपास के क्षेत्र, जबकि जोन-डी में गढ़ रोड, हापुड़ रोड, परीक्षितगढ़ रोड, मवाना रोड तथा इनसे जुड़े ग्रामीण और शहरी क्षेत्र शामिल हैं। विस्तृत सर्वे के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन जोन में कितने भवन कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
भवन स्वामियों और कारोबारियों में बेचैनी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे ज्यादा चिंता उन भवन स्वामियों और कारोबारियों में है, जिनके आवासीय भवनों में दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कई लोगों ने वर्षों पहले संपत्तियां खरीदी थीं और उनमें निवेश किया है।
मेडा के सामने अब अदालत के निर्देशों का अनुपालन करने के साथ सर्वे, चिन्हांकन और कार्रवाई की विस्तृत प्रक्रिया तैयार करने की चुनौती है। अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले तीनों जोन की स्थिति का ब्योरा भी तैयार करना होगा।
शास्त्रीनगर के प्रभावितों को राहत की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में लंबे समय से धरना दे रहे लोगों में भी मायूसी है। प्रभावित परिवार अपने मकान और दुकानों को लेकर चिंतित हैं। दूसरी ओर, पुनर्वास नीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के प्रभावित भवनों के लिए पुनर्वास नीति लाने की बात रखी गई है। आवास एवं विकास परिषद की ओर से पहले की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की गई थी।
जनप्रतिनिधियों ने बताई री-सर्वे और दुकानों की योजना
इसी बीच बुधवार को भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता कर प्रभावित लोगों को राहत देने से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों की ओर से कहा गया कि मेडा की ओर से री-सर्वे कराया जाएगा। शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में दुकानदारों के लिए करीब साढ़े छह सौ दुकानों को लीज पर दिए जाने की योजना पर भी काम किए जाने की बात कही गई।
इसके अलावा सरकारी खाली पड़ी भूमि पर कॉम्प्लेक्स विकसित करने का प्रस्ताव भी बताया गया। हालांकि इन प्रस्तावों के अंतिम स्वरूप और क्रियान्वयन की स्थिति संबंधित विभागों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
एमएलसी चुनाव की तैयारियों के बीच पत्रकार वार्ता में जनप्रतिनिधियों से कई सवाल भी किए गए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कुछ सवालों के जवाब देने से परहेज किया।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होनी है। इससे पहले मेडा को जोन-बी, सी और डी में अवैध निर्माणों की स्थिति का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर के बड़े हिस्से में सर्वे और चिन्हांकन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
फिलहाल 16,726 भवनों पर कार्रवाई का आदेश और बाकी तीन जोन के सर्वे ने पूरे मेरठ में भवन स्वामियों, व्यापारियों और कॉलोनी निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें मेडा की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली अगली स्टेटस रिपोर्ट पर हैं।


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