सुप्रीम कोर्ट से TMC को झटका, ED के फ्रीज किए बैंक खातों में दखल से इनकार

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बैंक खातों के फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को संतुलित बताया। हालांकि, अदालत ने पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था जारी रखने की अनुमति दी है।

न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ईडी द्वारा TMC के तीन HDFC बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था।

रोजमर्रा के खर्चों के लिए जारी रहेगी व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश संतुलित है, क्योंकि इससे पार्टी के दैनिक कामकाज पर रोक नहीं लगती और खातों के संचालन पर न्यायिक निगरानी भी बनी रहती है। अदालत ने मामले को हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के विवेक पर छोड़ते हुए कहा कि संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां मुख्य याचिका में उठा सकते हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके समक्ष मामला TMC के अलग-अलग गुटों के बीच विवाद से संबंधित नहीं है। सुनवाई केवल फ्रीज किए गए बैंक खातों के संचालन से जुड़े सीमित मुद्दे तक ही है।

कपिल सिब्बल ने उठाया 400 करोड़ से अधिक जमा होने का मुद्दा

TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फ्रीज किए गए खातों में 400 करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं। उन्होंने दलील दी कि खातों पर रोक के कारण पार्टी कर्मचारियों को वेतन और अन्य भुगतान करने में परेशानी हो रही है।

वहीं, ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि पार्टी को दैनिक खर्चों के लिए खातों के संचालन की अनुमति पहले से मिली हुई है। उन्होंने करीब 120 करोड़ रुपये उपलब्ध होने की बात भी कही।

हाई कोर्ट ने नियुक्त किया था विशेष अधिकारी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 9 जुलाई को TMC को तीन खातों से दैनिक और कानूनी खर्चों के लिए राशि निकालने की अनुमति दी थी। हालांकि, इसके लिए कड़ी न्यायिक निगरानी की व्यवस्था की गई थी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक खातों के संचालन की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया था। व्यवस्था के तहत TMC के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन राशि निकालने के लिए विशेष अधिकारी का प्रति-हस्ताक्षर भी जरूरी है।

440 करोड़ रुपये के करीब है तीनों खातों में जमा राशि

मामला TMC के तीन HDFC बैंक खातों से जुड़ा है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं। पुलिस को शिकायत मिली थी कि इन पैसों का दुरुपयोग हो सकता है और इनमें भ्रष्टाचार तथा उगाही से जुड़ी रकम शामिल हो सकती है। इसके बाद खातों से निकासी पर रोक लगाई गई थी।

बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने 23 जून को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर ECIR दर्ज की। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17(1-ए) के तहत खातों से निकासी पर रोक लगाई।

ED का आरोप है कि इन खातों से करीब 164 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। TMC ने कार्रवाई को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दावा किया था कि खातों को फ्रीज करने का फैसला मनमाना है और ED किसी विशेष अपराध से जुड़ी रकम की पहचान कर उसे अलग करने में विफल रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ED की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया है और खातों के दैनिक संचालन से जुड़ी मौजूदा अंतरिम व्यवस्था को जारी रखा है।

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