बंगाल में फिर चुनाव की उठी नौबत? SIR में कटे 90% नाम सही पाए जाने का दावा

 31 सीटों पर नतीजे पर असर का सवाल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत में यह सवाल उठा कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जाने की पुष्टि होती है और इसका चुनाव परिणाम पर सीधा असर पड़ता है, तो क्या दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया जा सकता है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी विधानसभा सीट पर जीत का अंतर 50 वोट है और 100 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, तो इनमें से 70 नाम गलत तरीके से काटे जाने की पुष्टि होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

83 हजार मामलों में फैसला, 90 प्रतिशत नाम सही होने का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में एक डेटा रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि SIR से जुड़े अब तक करीब 83 हजार मामलों में ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया है। इनमें लगभग 75 हजार मामलों में मतदाताओं के नाम काटे जाने को गलत माना गया। इस आधार पर करीब 90 प्रतिशत मामलों में नाम सही पाए जाने का दावा किया गया है।

दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े करीब 38 लाख मामले हैं। इनमें लगभग 31 लाख मामले नाम काटे जाने के खिलाफ और करीब सात लाख मामले नाम बचाए जाने से संबंधित बताए गए हैं। हालांकि, अभी तक कुल मामलों के एक छोटे हिस्से में ही फैसला आया है।

31 विधानसभा सीटों पर परिणाम प्रभावित होने का दावा

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि SIR में काटे गए मतदाताओं की संख्या कई सीटों पर जीत के अंतर से अधिक है। पार्टी के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के मुताबिक ऐसी 31 विधानसभा सीटें हैं, जहां जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम है।

इनमें बाली, हेमताबाद और सतगछिया जैसी सीटों का भी उल्लेख किया गया है। तृणमूल का आरोप है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें बड़ी संख्या उसके समर्थकों की थी।

क्या दोबारा होंगे बंगाल में चुनाव?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह सवाल उठाया कि क्या अदालत नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे सकती है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल दोबारा चुनाव कराने का कोई आदेश नहीं दिया है और इस मुद्दे पर आगे विचार की बात कही गई है।

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कराने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। वहीं, अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को संपूर्ण न्याय के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में यदि SIR के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित होने का ठोस आधार सामने आता है तो इस मामले में आगे कानूनी बहस महत्वपूर्ण होगी।

चुनाव नतीजों के बाद और बढ़ा विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने 294 में से 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं। राज्य में सरकार बनाने के लिए 148 विधायकों का समर्थन जरूरी है।

अब SIR में काटे गए नामों और चुनाव परिणामों के बीच संभावित संबंध को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पश्चिम बंगाल में दोबारा विधानसभा चुनाव होंगे। इसके लिए अदालत के समक्ष ठोस आंकड़ों, प्रभावित सीटों और चुनाव परिणाम पर वास्तविक प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होगा।

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