कूटरचित अंकपत्र से नियुक्ति मामले में राज्यपाल सचिवालय सख्त

- काशी विद्यापीठ, वाराणसी से मांगी कार्रवाई की आख्या

- श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज, वाराणसी का है मामला

वाराणसी/लखनऊ। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से जुड़े एक शिकायत प्रकरण में प्रदेश के राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई कर उसकी आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामला श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज, वाराणसी के समाजशास्त्र विभाग की प्रोफेसर, डॉ. आभा सक्सेना की कथित कूटरचित अंकपत्र के आधार पर अवैध नियुक्ति एवं वित्तीय अनियमितता के आरोपों से संबंधित बताया गया है।
राज्यपाल सचिवालय के विशेष कार्याधिकारी की ओर से कुलपति, म.गां. काशी विद्यापीठ, वाराणसी को भेजे गए पत्र में पूर्व में प्राप्त शिकायत एवं उसके संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार,डॉ. उषा चौधरी एवं अन्य शिक्षकों, जिन्हें प्रबंधक द्वारा कथित रूप से अनन्यायपूर्वक कार्यमुक्त कर दिया गया था, ने पहले  कुलपति एवं बाद में राजभवन पत्र प्रेषित कर उचित कार्रवाई करने का निवेदन किया था। प्रश्नगत प्रकरण काफी पुराना है।

राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया है कि प्रकरण में परीक्षणोपरांत नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा की गई कार्रवाई की  साक्ष्य सहित निस्तारण आख्या/अपनी संस्तुति निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराई जाए।
पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन से 20 अगस्त, 2026 तक निस्तारण आख्या/संस्तुति राज्यपाल सचिवालय एवं प्रत्यावेदनकर्ता को उपलब्ध कराने तथा आक्षेप की आख्या प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी निर्धारित करने का उल्लेख है। साथ ही 27 अगस्त 2026 को निस्तारण आख्या/संस्तुति के साथ कुलसचिव एवं संबंधित अधिकारी/कर्मचारी को लखनऊ स्थित जनभवन में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी इस पत्र के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े इस प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की स्थिति पर नजर बनी हुई है। गौरतलब है कि इस प्रकरण सहित अन्य प्रकरण में 29 जुलाई, 2026 को महामहिम श्री राज्यपाल के ओएसडी  अशोक देसाई, कुलपति और कुलसचिव, काशी विद्यापीठ एवं क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी के प्रतिनिधि ने अग्रसेन कॉलेज के परमानंदपुर परिसर में जाँच हेतु पहुंचे थे, जहां कॉलेज की प्रबंधक डॉ. मधु अग्रवाल एवं प्राचार्य प्रो. मिथिलेश सिंह शिक्षकों के साथ उपस्थित थीं। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही हो सकेगा।

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