NALSAR छात्रों के मामले में CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई फटकार, बोले- छात्रों की बात में दखल क्यों?
नई दिल्ली। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों के विरोध के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि BCI या कोई भी राज्य बार काउंसिल NALSAR समेत किसी भी लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करे।
CJI ने BCI से कहा- इसका आपसे क्या लेना-देना?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों के विरोध को लेकर BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के पास विरोध करने का कोई कारण है तो BCI का उससे कोई लेना-देना नहीं है।
CJI ने कहा, “छात्रों ने मुझे एक पत्र लिखा है। यह छात्रों और मेरे बीच की बातचीत है। यह बिल्कुल अनावश्यक था।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब वह खुद छात्र थे तो छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों को विरोध करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
BCI ने NALSAR के छात्रों के एनरोलमेंट पर लगाई थी रोक
विवाद तब बढ़ा जब BCI ने 13 अगस्त को सभी राज्य बार काउंसिलों को सर्कुलर जारी किया। इसमें NALSAR से 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल नहीं करने का निर्देश दिया गया था।
BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर सत्यापित रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट में उन लोगों की पहचान करने को कहा गया था, जो कथित तौर पर छात्रों के अभियान को शुरू करने, आयोजित करने या उसमें लोगों को जुटाने में शामिल थे।
CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाने का हुआ था विरोध
दरअसल, NALSAR के कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी, जिसमें CJI सूर्यकांत को आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने की बात सामने आई थी।
इसी विरोध के बाद BCI की ओर से छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर आदेश जारी किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद BCI के वकील ने बताया कि विवादित आदेश वापस ले लिया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने हालांकि अदालत को बताया कि आदेश वापस लेने के बावजूद उसके आधार पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
जस्टिस बागची ने भी BCI की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी BCI के फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या BCI को ऐसा प्रस्ताव पारित करने के लिए बुलाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए अंतरिम तौर पर छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
CJI ने छात्रों को एनरोलमेंट कराने के लिए किया प्रोत्साहित
CJI सूर्यकांत ने छात्रों के पेशेवर भविष्य को लेकर भी भरोसा दिलाया। उन्होंने छात्रों से एनरोलमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा और उन्हें कानूनी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे एनरोलमेंट कराएं और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हों। CJI के इस रुख के बाद NALSAR के छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता बंद हो गया है। वहीं, BCI के वापस लिए गए आदेश और उसकी निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर आगे की सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।


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