विजय थलापति को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को नौकरी का फैसला बरकरार

नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति को करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने का फैसला प्रभावी बना हुआ है।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था नौकरी देने का फैसला?

मद्रास हाईकोर्ट ने जुलाई में तमिलनाडु सरकार की ओर से करूर भगदड़ में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के आदेश को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक रोजगार संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप होना चाहिए और इसे राज्य की ओर से विशेष रियायत के तौर पर नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट के सामने यह भी तर्क रखा गया था कि सरकारी विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के लिए पहले से निर्धारित नियम और प्रतीक्षा सूची मौजूद है। ऐसे में विशेष मामले में नियमों को दरकिनार कर नियुक्ति देना उचित नहीं होगा।

करूर भगदड़ में गई थी 41 लोगों की जान

27 सितंबर 2025 को करूर में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की एक राजनीतिक सभा के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। उस समय विजय थलापति सभा को संबोधित कर रहे थे।

हादसे के बाद तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिजनों की सहायता के लिए सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। बाद में इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परिवारों को राहत

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले में नोटिस जारी किया।

इससे करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह अंतरिम आदेश है और मामले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई के बाद होगा।

यानी फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई सरकारी नौकरियों का रास्ता फिर खुल गया है, लेकिन नियुक्तियों की अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

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