केएल इंटरनेशनल में CT-एआई पर जिला स्तरीय मंथन, दो केस पेपर रीजनल कॉन्फ्रेंस के लिए चयनित

मेरठ। केएल इंटरनेशनल स्कूल में कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर जिला स्तरीय विचार-विमर्श कार्यशाला (डीएलडी वर्कशॉप) का आयोजन किया गया। इसमें सीबीएसई नोएडा रीजन की सीओई हेड मौशमी सरकार, अंडर सेक्रेटरी गुलाब सिंह, डीडीटीसी (Deputy District Training Coordinator) गोपाल दीक्षित और एआई विशेषज्ञ नवीन शर्मा सहित मेरठ जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की।

कार्यशाला की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य, सीबीएसई सिटी कोऑर्डिनेटर एवं डीटीसी (District Training Coordinator) सुधांशु शेखर ने की। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को CT और AI आधारित शिक्षण गतिविधियों, नवाचारों और उनके प्रभावों को साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा।

14 विद्यालयों ने साझा किए नवाचार

कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों की ओर से 14 केस पेपर्स प्रस्तुत किए गए। इनमें कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन गतिविधियों, प्रयोगों और अनुभवों को साझा किया गया। शिक्षकों ने एक-दूसरे की श्रेष्ठ शैक्षिक पद्धतियों और नवाचारों को समझते हुए उन्हें अपने विद्यालयों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

प्रस्तुत केस पेपर्स में से आगामी रीजनल कॉन्फ्रेंस के लिए दो केस पेपर्स का चयन किया गया। इनमें “CT और AI के लिए तैयारी में गणित की अहम भूमिका” विषय पर श्रीमती कामिनी कपूर एवं श्री अंकुर फार्सवाल तथा “असल दुनिया के संदर्भों में AI” विषय पर श्रीमती रेशु गर्ग का केस पेपर शामिल है।

विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता विकसित करने पर जोर

विशेषज्ञों ने शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों में समस्या-समाधान क्षमता, तार्किक चिंतन और तकनीकी दक्षता विकसित करने पर जोर दिया। कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में विद्यार्थियों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि समस्याओं को समझकर उनके रचनात्मक समाधान खोजने के लिए भी तैयार करना जरूरी है।

मौशमी सरकार ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल आकर्षक प्रस्तुतियां देना नहीं, बल्कि कक्षाओं में CT और AI से जुड़ी वास्तविक गतिविधियों तथा उनके प्रभावों को साझा करना है। उन्होंने शिक्षकों को कक्षा-कक्ष में किए जा रहे प्रयोगों और नवाचारों को एक-दूसरे तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया।

गुलाब सिंह ने शिक्षकों को कार्यशाला से मिली सीख को अपने विद्यालयों में लागू करने और सहकर्मियों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उससे प्राप्त ज्ञान विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में उपयोग हो।

प्रधानाचार्य एवं डीटीसी सुधांशु शेखर ने कहा कि चुनौतियों का सामना करने के लिए पहला कदम उठाना जरूरी है। शिक्षकों को एक-दूसरे से सीखते हुए नए नवाचारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने मेरठ के प्रधानाचार्यों के सामूहिक प्रयासों को सकारात्मक शैक्षिक बदलाव के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यशाला का समापन ज्ञान, अनुभव और नवाचार के सार्थक आदान-प्रदान के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने विभिन्न विद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों और नवाचारों से सीख लेते हुए उन्हें अपने संस्थानों में लागू करने की दिशा में अनुभव प्राप्त किया। कार्यशाला ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को CT एवं AI आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

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