एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में ‘डायबिटीज एवं ओरल हेल्थ’ पर CME का आयोजन
करीब 150 चिकित्सकों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया हिस्सा, मधुमेह और मौखिक स्वास्थ्य के पारस्परिक संबंधों पर विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी
मेरठ। एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज, मेरठ के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की ओर से Diabetes India, Oral Health तथा UPRSSDI के सहयोग से ‘डायबिटीज एवं ओरल हेल्थ’ विषय पर CME/Professional Enhancement Series का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संध्या गौतम ने की। आयोजन सचिव डॉ. स्नेहलता वर्मा तथा सह-आयोजन सचिव डॉ. श्वेता शर्मा रहीं।
कार्यक्रम का उद्देश्य मधुमेह और मौखिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों के प्रति चिकित्सकों, विद्यार्थियों एवं आमजन में जागरूकता बढ़ाने के साथ नवीनतम चिकित्सा जानकारी का आदान-प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता, उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक, एसआईसी डॉ. धीरज राज एवं सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने किया।
प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की CME नियमित रूप से आयोजित होनी चाहिए, ताकि चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन हो और समाज में विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने मधुमेह को गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारी बताते हुए समय पर जांच, उचित उपचार और जीवनशैली में सुधार को आवश्यक बताया।
उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक ने कहा कि मधुमेह का प्रभाव शरीर के लगभग सभी अंगों पर पड़ सकता है। अनियंत्रित रक्त शर्करा से हृदय, गुर्दे, आंखों, नसों और मौखिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार को मधुमेह नियंत्रण के लिए जरूरी बताया।
एसआईसी डॉ. धीरज राज ने कहा कि मधुमेह रोगियों में ओरल हेल्थ का विशेष महत्व है। अनियंत्रित मधुमेह में मसूड़ों और दांतों से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने मधुमेह रोगियों के उपचार में नियमित दंत परीक्षण एवं उचित मौखिक स्वच्छता को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से मधुमेह की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार और उससे जुड़ी जटिलताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने चिकित्सकों के साथ आमजन तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
आयोजन अध्यक्ष डॉ. संध्या गौतम ने ‘Should Diabetic Patients Undergo Dental Screening?’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि मधुमेह रोगियों में नियमित दंत एवं मौखिक स्वास्थ्य जांच से समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार संभव है। उन्होंने मधुमेह एवं ओरल हेल्थ के द्विपक्षीय संबंध को समझने तथा चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रो. डॉ. आभा गुप्ता ने ‘Periodontitis – 6th Complication of Diabetes’ विषय पर व्याख्यान देते हुए मधुमेह में पेरियोडॉन्टाइटिस के बढ़ते जोखिम तथा दोनों बीमारियों के परस्पर प्रभाव की जानकारी दी।
प्रो. डॉ. श्वेता शर्मा ने ‘Diabetes – Oral Reflections’ विषय पर बताया कि मधुमेह के विभिन्न प्रभाव मौखिक स्वास्थ्य में भी दिखाई दे सकते हैं और ओरल हेल्थ की स्थिति रोगी के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।
आयोजन सचिव सह-आचार्य डॉ. स्नेहलता वर्मा ने ‘Diabetes and Periodontitis – What Are the Pathomechanistic Links?’ विषय पर मधुमेह एवं पेरियोडॉन्टाइटिस के बीच विभिन्न पैथोमैकेनिस्टिक संबंधों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रो. डॉ. अनामिका शर्मा, पेरियोडॉन्टिस्ट, ने ‘Should Dental Patients Undergo Diabetic Screening?’ विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि दंत चिकित्सकों की भूमिका केवल मौखिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संदिग्ध मरीजों में मधुमेह की पहचान, स्क्रीनिंग और उचित रेफरल में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
डॉ. आयुषी सिंघल ने ‘What’s New in the Management of Diabetes’ विषय पर मधुमेह के उपचार में हुए नवीनतम एडवांसमेंट, नई दवाओं एवं आधुनिक उपचार रणनीतियों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. ईशा एवं डॉ. अंतरा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. शशांक, डॉ. ईशा, डॉ. दीपक, डॉ. मानवी, डॉ. मयंक, डॉ. तान्या, अंजू अनेजा एवं ललित का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
कार्यक्रम में डॉ. योगिता, डॉ. प्रीति, डॉ. निधि, डॉ. नेहा, डॉ. यास्मीन, डॉ. शकुन, डॉ. प्रदीप यादव, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. हिमानी, डॉ. देवांशी, डॉ. मुकेश, डॉ. अंशु, डॉ. अलका, डॉ. अमरेन्द्र चौधरी, डॉ. राहुल सिंह सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की।
CME में फाइनल ईयर एमबीबीएस के विद्यार्थियों, इंटर्न्स एवं डायलिसिस टेक्नीशियनों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में करीब 150 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम के माध्यम से मधुमेह एवं मौखिक स्वास्थ्य के पारस्परिक संबंधों को समझने, चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि करने तथा ‘Diabetes Care’ के साथ ‘Oral Health Care’ को भी समान महत्व देने का संदेश दिया गया।


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