शुद्धिकरण विवाद पर राहुल गांधी का हमला, बोले- भेदभाव करने वालों पर एससी-एसटी एक्ट में हो एफआईआर
खरगे की उत्तराखंड सभा के बाद शुद्धिकरण कराने का मुद्दा उठाया, भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर साधा निशाना
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दलितों के साथ भेदभाव और छुआछूत की घटनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी ने शुद्धिकरण की घटना को लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि देश में दो तरह की विचारधाराओं के बीच संघर्ष है। एक तरफ डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान है और दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा की विचारधारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में दलितों को आज भी कई स्तरों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
खरगे की सभा के बाद शुद्धिकरण का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे हाल ही में हल्द्वानी गए थे और जिस स्थान पर उनकी सभा हुई, वहां बाद में शुद्धिकरण किया गया। उन्होंने कहा कि खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कथित शुद्धिकरण को उचित ठहराया।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि इस तरह की घटनाओं से देश को एकजुट कैसे रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर देश का ध्यान केंद्रित होना चाहिए और भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
दलितों के साथ भेदभाव का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी दलितों के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर जाति के आधार पर लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ चाय की दुकानों पर अलग-अलग तरह के कप इस्तेमाल किए जाते हैं और आरोप लगाया कि दलितों के लिए अलग कप रखे जाने जैसी घटनाएं आज भी देखने को मिलती हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और सामाजिक भेदभाव को खत्म करना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। उन्होंने शुद्धिकरण की घटना को इसी व्यापक सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।


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