नेपाल ने विदेशी मदद कभी नहीं ठुकराई, भ्रामक प्रचार न करें : पीएम बालेन शाह
विदेशी सहायता और बचाव दलों को लेकर उठे सवालों पर प्रधानमंत्री ने दी सफाई, कहा- राहत कार्य में सहयोग का स्वागत
काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी सहायता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि नेपाल ने विदेशी मदद को कभी अस्वीकार नहीं किया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि विदेशी सहायता को लेकर किसी तरह का भ्रामक प्रचार न किया जाए।
प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि नेपाल को मिलने वाली मानवीय सहायता का स्वागत किया जा रहा है। हालांकि, राहत एवं बचाव अभियान में विदेशी टीमों की प्रत्यक्ष तैनाती को लेकर नेपाल अपनी परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार निर्णय ले रहा है। उन्होंने विदेशी सहायता को पूरी तरह ठुकराए जाने की बात को गलत बताया।
विदेशी बचाव दलों पर अलग रुख
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद यह खबरें सामने आई थीं कि सरकार ने भारत, चीन और अन्य देशों की ओर से भेजे जाने वाले विदेशी खोज एवं बचाव दलों को अनुमति नहीं दी। इसके बाद नेपाल सरकार के फैसले को लेकर सवाल उठने लगे थे। प्रधानमंत्री शाह के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हुआ कि विदेशी सहायता और विदेशी बचाव दलों की तैनाती दो अलग-अलग विषय हैं।
सरकार का जोर फिलहाल नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद से राहत एवं बचाव अभियान चलाने पर है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी है।
भारत समेत कई देशों से मिल रही सहायता
आपदा के बाद भारत समेत कई देशों ने नेपाल के प्रति सहयोग की पेशकश की है। राहत सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान के जरिए मदद पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं। नेपाल सरकार की ओर से विदेशी सहायता को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए समन्वित व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री शाह के बयान का मकसद विदेशी मदद को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल को मिलने वाली मानवीय सहायता के प्रति सरकार का रुख सकारात्मक है, लेकिन राहत एवं बचाव अभियान का संचालन नेपाल की अपनी एजेंसियों के नेतृत्व में किया जा रहा है।
नेपाल सरकार ने लोगों से अपील की है कि आपदा जैसे संवेदनशील समय में अपुष्ट सूचनाओं और भ्रामक प्रचार से बचें तथा आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।


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