सीसीएसयू में तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम शुरू
डिजिटल तकनीक और एआई पर हुई चर्चा
मेरठ, 12 अगस्त 2026। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का बुधवार को शुभारंभ हुआ। 12 से 14 अगस्त तक आयोजित कार्यक्रम का विषय “शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ” रखा गया है।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों और प्रशिक्षु शिक्षकों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और मेघ संगणन जैसी आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है। कार्यक्रम के लिए 140 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जबकि पहले दिन 90 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में शोध निदेशालय के निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सीआईईटी-एनसीईआरटी के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शिरीष पाल सिंह, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. अरुण कुमार, डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल और डॉ. वैभव शर्मा समेत अनेक शिक्षाविद मौजूद रहे।
पहले सत्र में प्रो. टागरम कोंडाला राव ने शिक्षा क्षेत्र में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय डिजिटल पहलों और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षण वर्तमान समय की आवश्यकता बन चुका है और शिक्षकों को उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
इसके बाद प्रो. शिरीष पाल सिंह ने ई-सामग्री विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री के निर्माण में विकास, संग्रहण, वितरण, पहुंच और मूल्यांकन पांच प्रमुख आयाम हैं। उन्होंने विषयवस्तु, शिक्षण पद्धति और तकनीक के समन्वय को प्रभावी शिक्षण की आधारशिला बताया।
डॉ. रुचि द्विवेदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संवर्धित बुद्धिमत्ता के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा में तकनीक का उद्देश्य मानवीय क्षमताओं का स्थान लेना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं है, बल्कि उनके कार्यों को अधिक दक्ष, सटीक और प्रभावी बनाने में सहयोगी तकनीक है।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों और प्रशिक्षु शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं को मजबूत करने तथा उन्हें नवीन शैक्षिक तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रथम दिवस का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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