इलाज के लिए भटकते रहे मरीज, ड्यूटी के दौरान मेहंदी लगवाती दिखीं महिला कर्मचारी
वायरल वीडियो से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, CMO ने दिए जांच के आदेश; वीडियो की तारीख और कर्मचारियों की ड्यूटी की होगी पड़ताल
मेरठ। अब्दुल्लापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करने और महिला कर्मचारियों के कथित तौर पर ड्यूटी के दौरान मेहंदी लगवाने का मामला सामने आया है। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रसाद ने जांच के आदेश दिए हैं।
बताया गया कि दानिश नामक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को टीका लगवाने के लिए अब्दुल्लापुर सीएचसी पहुंचा था। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब उसकी पत्नी को उपचार नहीं मिला तो वह कर्मचारियों से जानकारी लेने अंदर पहुंचा। आरोप है कि वहां उसे बताया गया कि अस्पताल प्रभारी छुट्टी पर हैं, जिसके कारण काम नहीं हो पा रहा है।
मेहंदी लगवाते दिखीं महिला कर्मचारी
इसी दौरान दानिश और उसके साथ मौजूद तीमारदार ने अंदर का नजारा देखा। आरोप है कि कुछ महिला कर्मचारी मरीजों की देखभाल करने के बजाय आपस में बैठकर मेहंदी लगवा रही थीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी व्यक्ति ने बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कार्यशैली और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वीडियो कब का है और उसमें दिखाई दे रही महिला कर्मचारियों की उस समय ड्यूटी थी या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
CMO ने दिए जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रसाद ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच में वीडियो की तारीख, संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी, मरीज के उपचार में हुई देरी और उस समय सीएचसी में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की पड़ताल की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती थी या वायरल वीडियो के पीछे कोई अन्य परिस्थितियां थीं। जांच के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वायरल वीडियो की सत्यता भी जांच का विषय
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि वायरल वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और उसमें दिखाई दे रहा घटनाक्रम किस परिस्थिति का है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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