ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी की उन्नत सर्जरी से मरीजों को मिल रही नई जिंदगी

एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में इस साल 15-20 मरीजों की सफल सर्जरी और पुनर्वास, प्लास्टिक सर्जरी विभाग बना पश्चिमी यूपी का प्रमुख केंद्र

मेरठ। लाला लाजपत राय स्मारक (एलएलआरएम) मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा विभाग में ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी के जटिल मामलों का आधुनिक माइक्रोसर्जिकल तकनीकों से सफल उपचार किया जा रहा है। विभाग में नर्व सर्जरी के जरिए गंभीर चोट के कारण हाथ की कार्यक्षमता खो चुके मरीजों को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल रही है।

विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक करीब 15 से 20 मरीजों की ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी की सफल सर्जरी की जा चुकी है। इनमें अधिकांश मरीज सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों या अन्य गंभीर चोटों के कारण हाथ की नसों को नुकसान पहुंचने से प्रभावित थे। ऑपरेशन के बाद मरीजों को व्यवस्थित पुनर्वास और फिजियोथेरेपी कराई गई, जिससे उनकी हाथ की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे दोबारा दैनिक कार्य करने में सक्षम हो रहे हैं।

गर्दन से हाथ तक की नसों के जाल में होती है चोट

प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि ब्रेकियल प्लेक्सस गर्दन से हाथ तक जाने वाली नसों का एक महत्वपूर्ण जाल है। इसमें गंभीर चोट लगने पर हाथ में कमजोरी, लकवा या हाथ का पूरी तरह काम करना बंद होने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार और माइक्रोसर्जरी से हाथ की कार्यक्षमता को काफी हद तक वापस लाया जा सकता है। विभाग में मरीज की स्थिति के अनुसार नर्व ग्राफ्टिंग, नर्व ट्रांसफर, टेंडन ट्रांसफर और जरूरत पड़ने पर मसल ट्रांसफर जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सर्जरी के बाद पुनर्वास भी उपचार का अहम हिस्सा

डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद नियमित फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सर्जरी के साथ व्यवस्थित रिहैबिलिटेशन से मरीजों को हाथ की कार्यक्षमता वापस पाने में बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

पश्चिमी यूपी में महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा मेडिकल कॉलेज

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा कि संस्थान का प्लास्टिक सर्जरी विभाग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जटिल पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा और माइक्रोसर्जरी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां हाथ की नसों की जटिल चोटों, कटे हुए अंगों के प्रत्यारोपण, जटिल हाथ की सर्जरी और अन्य पुनर्निर्माण सर्जरी का नियमित उपचार किया जा रहा है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि सड़क दुर्घटना या किसी अन्य गंभीर चोट के बाद हाथ में कमजोरी, हाथ न उठ पाना, उंगलियां न चलना या हाथ सुन्न पड़ने जैसे लक्षणों को सामान्य चोट मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मरीजों को जल्द से जल्द प्लास्टिक सर्जरी एवं माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से हाथ की कार्यक्षमता को काफी हद तक बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

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