मेरठ को ‘नाट्य नगरी’ बनाने का संकल्प, ‘जश्न-ए-कामयाबी’ में सम्मानित हुए अनिल शर्मा और विनोद कुमार बेचैन

मेरठ, 18 अगस्त। मेरठ की साहित्यिक और रंगमंचीय गतिविधियों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से मेरठ को ‘नाट्य नगरी’ बनाने का संकल्प लिया गया है। मेरठ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि जिस तरह मेरठ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, खेल, शिक्षा, चिकित्सा, कैंची और सूती वस्त्रों के लिए जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में नाट्य गतिविधियों के लिए भी इसकी पहचान बनेगी।

यह विचार उन्होंने सीसीएस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से प्रेमचंद सेमिनार हॉल में आयोजित ‘जश्न-ए-कामयाबी’ कार्यक्रम में अध्यक्षीय संबोधन के दौरान व्यक्त किए। कार्यक्रम हाल ही में मंचित नाटक ‘गोरखधंधा’ की सफलता के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि मेरठ की नई नाट्य संस्था मेरठ आर्टिस्ट एसोसिएशन प्रेमचंद की विचारधारा का बेहतरीन प्रतिनिधित्व कर रही है। संस्था का प्रयास नए पात्रों और नए विषयों पर नाटक प्रस्तुत कर जनता को रंगमंच की महत्ता एवं उपयोगिता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक भाईचारे, सहिष्णुता और सामाजिक कल्याण को मजबूत करने वाले विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसे प्रयास समाज के ‘बंद द्वार’ खोलने और शांति व भाईचारे को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने नाटक ‘गोरखधंधा’ की सफलता पर सभी कलाकारों को बधाई देते हुए विशेष रूप से निर्देशक अनिल शर्मा और संयोजक विनोद कुमार बेचैन के योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. इरशाद सियानवी ने नाटक के कलाकारों का पुष्पों से स्वागत कर की। संचालन राशिद यूसुफ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आसिफ अली ने प्रस्तुत किया। इस दौरान नाटक के निर्देशक अनिल शर्मा और संयोजक विनोद कुमार बेचैन को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद विनोद कुमार बेचैन ने उर्दू विभाग के सदस्यों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि नाटक की शानदार सफलता के बाद ‘जश्न-ए-कामयाबी’ का आयोजन कलाकारों के उत्साह को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा, “हमें धरती पर चलते हुए आकाश पर नजर रखनी चाहिए, तभी हम सफल होंगे।” उन्होंने भविष्य में इससे बेहतर कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया। अनिल शर्मा ने भी उर्दू विभाग के प्रति आभार जताया।

उल्लेखनीय है कि प्रेमचंद जयंती के अवसर पर तथा प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार स्वर्गीय सुरेंद्र शर्मा की स्मृति में विश्वविद्यालय के अटल सभागार में नाटककार जयवर्धन द्वारा लिखित नाटक ‘गोरखधंधा’ का मंचन किया गया था। इसका निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। नाटक को दर्शकों की शानदार प्रतिक्रिया मिली और पूरे मंचन के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

नाटक की सफलता में पर्दे के पीछे काम करने वाले कलाकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। मेकअप आर्टिस्ट आबिद सैफी ने प्रभावी मेकअप किया, जबकि जितेंद्र सी. राज की प्रकाश व्यवस्था और संगीत ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नाटक की सफलता का श्रेय संयोजक विनोद कुमार बेचैन के अथक प्रयासों को भी दिया।

इस अवसर पर डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, हेमंत गोयल, रुपाली गुप्ता, शहजाद, फैजान यासीन, अतहर खान, शाह ए ज़मन, फरहत अख्तर, मोहम्मद शमशाद, मोहम्मद शाहवेज, मोहम्मद इमरान, आबिद सैफी, साजिद सैफी और सईद अहमद सहारनपुरी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts