चीनी की जमाखोरी रोकने को स्टॉकिस्टों के गोदामों में छापेमारी

मेरठ में प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी, डीलरों के स्टॉक का हो रहा सत्यापन; 4,000 कुंतल की अधिकतम सीमा

मेरठ। बाजार में चीनी के भाव और उपलब्ध स्टॉक को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रशासन ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। उप गन्ना आयुक्त मेरठ यशपाल सिंह के अनुसार जिले में चीनी स्टॉकिस्टों और डीलरों के गोदामों की लगातार जांच कराई जा रही है। अब तक किसी भी स्थान पर निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का स्टॉक या कृत्रिम कमी पैदा करने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।

उप गन्ना आयुक्त ने बताया कि भारत सरकार की ओर से चीनी मिलों के लिए हर महीने कोटा निर्धारित किया जाता है। इसी कोटे के आधार पर बाजार में चीनी की बिक्री और आपूर्ति की जाती है। आगामी पेराई सत्र को देखते हुए बाजार में चीनी की उपलब्धता और स्टॉक पर विशेष नजर रखी जा रही है।

पुराने सौदों और उठान की भी जांच

यशपाल सिंह ने बताया कि जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि पुराने सौदे होने के बाद यदि किसी कारण से सौदा निरस्त हो गया या चीनी का उठान नहीं हुआ तो कहीं उस स्टॉक को गलत तरीके से तो नहीं दर्शाया जा रहा। ऐसी संभावित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है।

जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक जिले में एसडीएम और संबंधित विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें चीनी स्टॉकिस्टों और डीलरों के गोदामों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।

डीलर रख सकता है अधिकतम 4,000 कुंतल चीनी

जांच में यह देखा जा रहा है कि किसी कारोबारी के पास निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडारण तो नहीं है। एक डीलर के पास अधिकतम 4,000 कुंतल चीनी रखने की सीमा निर्धारित है। अधिकारियों के मुताबिक अभी तक जांच में निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक का कोई मामला सामने नहीं आया है।

5,400 से 5,500 रुपये कुंतल के बीच भाव

उप गन्ना आयुक्त के अनुसार बाजार में चीनी का स्टॉक पर्याप्त है और मांग के अनुरूप आपूर्ति जारी है। अलग-अलग स्थानों पर चीनी के भाव में कुछ अंतर जरूर है। कहीं करीब 5,400 रुपये, तो कहीं 5,500 रुपये प्रति कुंतल के आसपास चीनी की बिक्री हो रही है। पुराने सौदों के आधार पर भी चीनी की आपूर्ति जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण फिलहाल कृत्रिम कमी जैसी स्थिति नहीं है। इसके बावजूद जमाखोरी और कालाबाजारी की किसी भी संभावना को रोकने के लिए गोदामों की जांच और स्टॉक की निगरानी जारी रहेगी।

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