भगवान कल्पवृक्ष हैं, उनके चरणों में रहकर जो मांगोगे, वह मिल जाएगा : स्वामी अभयानंद सरस्वती
रामचरितमानस उत्तरकांड पर सप्त दिवसीय सत्संग का शुभारंभ
मेरठ। राधा गोविंद मंडप, गढ़ रोड में बुधवार को सप्त दिवसीय सत्संग ‘रामचरितमानस—उत्तरकांड’ का शुभारंभ कथा व्यास परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अभयानंद सरस्वती जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य यजमान मनोज कुमार गुप्ता एवं उनके परिवार ने व्यास भगवान का स्वागत एवं पूजन किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री अनंतानंद सरस्वती जी महाराज ने समाज के कल्याण और संस्कारों को सुसंस्कृत बनाने के उद्देश्य से श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
कथा के प्रारंभ में स्वामी अभयानंद सरस्वती ने कहा, “राम कथा जे सुनत अघाहीं, रस विशेष तिन जाना नहीं।” उन्होंने कहा कि रामकथा का रस कभी फीका नहीं पड़ता। जिस प्रकार प्रिय व्यक्ति की चर्चा बार-बार सुनने पर भी आनंद देती है, उसी प्रकार प्रभु की कथा का श्रवण सदैव सुखदायी होता है।
उन्होंने कहा कि सेवक का धर्म अपने स्वामी की आज्ञा का पालन करना है। भरत जी ने 14 वर्षों तक भगवान श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर राज्य की व्यवस्था संभाली। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा, “भगवान कल्पवृक्ष हैं, उनके चरणों में रहकर जो मांगोगे, वह मिल जाएगा।”
स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य स्वयं अपने जीवन का निर्माता है। “जैसा हम बीज बोते हैं, वैसा ही फल हमें मिलता है।” उन्होंने कहा कि भजन, भक्ति और निष्ठा ही जीवन की वास्तविक संपत्ति हैं।
कथा में मनोज कुमार गुप्ता, बबीता गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, आलोक गुप्ता, आरके प्रसाद, सुभाष शर्मा, मयंक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
आयोजकों के अनुसार रामचरितमानस उत्तरकांड की कथा 12 से 18 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक होगी। वहीं ‘विवेक चूड़ामणि’ विषय पर सत्संग 13 से 19 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक सुमित्रा सत्संग भवन, जागृति विहार एक्सटेंशन में आयोजित किया जाएगा।


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