शिवसेना निशान विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल की दलील, बोले- ‘उद्धव के सहायक थे शिंदे’

नई दिल्ली। शिवसेना के नाम और चुनाव निशान को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। मामले में अगली सुनवाई गुरुवार को दोपहर दो बजे होगी।

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की कमान संभाली थी। उस समय एकनाथ शिंदे पार्टी में उद्धव ठाकरे के सहायक की भूमिका में थे। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शिंदे उनके नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रहे।

सिब्बल ने अदालत में शिवसेना के वर्ष 2013 और 2018 के पार्टी संविधान का हवाला देते हुए कहा कि इन्हीं संविधानों के आधार पर पार्टी ने चुनाव लड़े और संगठन में नियुक्तियां की गईं। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उस समय पार्टी के संविधान की वैधता को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया गया था।

‘पार्टी के फैसले को विधायक दल के फैसले से नहीं बदला जा सकता’

कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद का फैसला राजनीतिक दल के स्तर पर होना चाहिए, न कि केवल विधायक दल के किसी गुट के आधार पर। उन्होंने 2022 में शिंदे गुट के 39 विधायकों की ओर से किए गए प्रस्ताव और उसके बाद राज्यपाल को भेजे गए पत्र का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सुनील प्रभु की जगह भरत गोगावले को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का निर्णय भी वैध नहीं था। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक दल से अलग होकर विधायक दल की ओर से लिए गए ऐसे फैसलों को पार्टी का निर्णय नहीं माना जा सकता।

पार्टी संविधान के दस्तावेजों पर पीठ ने किए सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिवसेना के पार्टी संविधान से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल किए। पीठ ने पूछा कि संविधान से संबंधित दस्तावेज जनवरी 2013 में चुनाव आयोग को भेजे गए थे या नहीं और उन पर किए गए हस्ताक्षरों की पुष्टि किस प्रकार की जा सकती है।

मामले में अब गुरुवार दोपहर दो बजे फिर सुनवाई होगी। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से शिवसेना के नाम और चुनाव निशान पर अपने-अपने दावों के समर्थन में दलीलें रखी जाएंगी।

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