ट्रेन में सामूहिक दुष्कर्म पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
रेलवे को देना होगा ₹3 लाख मुआवजा
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2012 में बिहार के लखीसराय रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के डिब्बे में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई महिला को 3 लाख रुपये मुआवजा देने के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने रेलवे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने NHRC के फैसले को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि ट्रेन में वैध टिकट के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है। रेलवे यात्रियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
ट्रेन के अंदर हुई घटना, इसलिए रेलवे जिम्मेदार
हाई कोर्ट ने 29 जुलाई के आदेश में कहा कि पीड़िता वैध टिकट लेकर ट्रेन में सफर कर रही थी। घटना ट्रेन के एक डिब्बे के भीतर हुई, इसलिए इसे रेलवे अधिनियम की धारा 123(ग) के तहत 'अवांछित घटना' माना जाएगा। इसके चलते रेलवे अधिनियम की धारा 124ए के तहत रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है।
अदालत ने कहा कि NHRC ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की पीड़िता को आर्थिक सहायता देने की सिफारिश कर अपने अधिकार क्षेत्र का उचित इस्तेमाल किया। मुआवजा देने के आदेश में न तो मनमानी है और न ही कोई कानूनी खामी।
रेलवे की याचिका खारिज
रेल मंत्रालय ने NHRC के आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि मुआवजा निर्धारित करने का अधिकार केवल रेलवे दावा अधिकरण के पास है। हालांकि, NHRC ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और अपने आदेश को बरकरार रखा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी रेलवे की याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। साथ ही रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान रेलवे की ओर से जमा कराई गई 3 लाख रुपये की मुआवजा राशि और उस पर अर्जित ब्याज पीड़िता को जारी किया जाए।
2012 में लखीसराय स्टेशन पर हुई थी वारदात
यह मामला अगस्त 2012 का है। बिहार के लखीसराय रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर खड़ी यात्री ट्रेन के एक डिब्बे में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद पीड़िता के पिता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी।


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