महाशिवरात्रि की सुबह झमाझम बारिश से बदला मौसम, गर्मी-उमस से मिली राहत
चार साल में मंगलवार को सबसे अधिक बरसात, शहर की सड़कें और गली-मोहल्ले जलमग्न; शास्त्रीनगर में घरों में घुसा पानी, नाले हुए लबालब
मेरठ। महाशिवरात्रि के पर्व पर मंगलवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने मेरठ का मौसम बदल दिया। करीब तीन घंटे तक हुई तेज बारिश से जहां गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली, वहीं शहर के कई इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सड़कें और गली-मोहल्ले पानी से लबालब हो गए। कई निचले इलाकों में लोगों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे। इसके बाद तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहाना हो गया। महाशिवरात्रि पर मंदिरों और शिवालयों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बारिश के बीच आवाजाही करनी पड़ी।
चार साल में मंगलवार को सबसे अधिक बारिश
शहर में मंगलवार को हुई बारिश ने पिछले कई दिनों की गर्मी और उमस से राहत तो दिलाई, लेकिन इसकी तीव्रता ने जलनिकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। लोगों के मुताबिक पिछले चार साल में मंगलवार को हुई बारिश जैसी तेज बरसात उन्होंने नहीं देखी। करीब तीन घंटे तक लगातार बारिश होने से देखते ही देखते शहर की सड़कों पर पानी भर गया।
शास्त्रीनगर में घरों में घुसा पानी
बारिश का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में दिखाई दिया। शास्त्रीनगर के अधिकांश ब्लॉकों में नालियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी घरों में घुस गया। घरों में पानी भरने से लोग परेशान रहे। कई परिवार घंटों तक घरों से पानी निकालते नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना था कि हर बार बारिश में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन मंगलवार को स्थिति ज्यादा खराब रही। नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी घरों और गलियों में जमा हो गया।
तीन घंटे की बारिश में सड़कें हुईं जलमग्न
लगातार करीब तीन घंटे हुई बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कें और गली-मोहल्ले पानी में डूब गए। कई स्थानों पर सड़क और नाली का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था। जलभराव के कारण राहगीरों को परेशानी हुई और वाहन चालकों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
नाले बने नदी, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
तेज बारिश के कारण शहर से गुजरने वाले नाले भी लबालब हो गए। कई जगह नालों में पानी का बहाव इतना तेज था कि वे नदी की तरह नजर आने लगे। इससे शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
बारिश जहां लोगों के लिए गर्मी और उमस से राहत लेकर आई, वहीं जलभराव ने नगर की जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत भी सामने रख दी। यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो निचले इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।


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