2 हजार से अधिक जेन जी युवाओं ने गुरुदेव संग साझा किए जीवन के सवाल, महत्वाकांक्षा और आध्यात्मिकता पर खुला संवाद

बेंगलुरु, 23 अगस्त। बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र शनिवार को 2,000 से अधिक जेन जी युवाओं की ऊर्जा, संगीत और उत्साह से सराबोर रहा। युवाओं ने वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के साथ जीवन, प्रेम, करियर, महत्वाकांक्षा, धन, माता-पिता और आध्यात्मिकता से जुड़े सवालों पर खुलकर संवाद किया।

युवाओं के सवाल बेहद व्यावहारिक थे—डर के बावजूद अपने पक्ष में कैसे खड़ा हों, महत्वाकांक्षा और आंतरिक शांति में संतुलन कैसे बनाएं, माता-पिता को अपनी बात कैसे समझाएं और क्या धन-संपन्न जीवन की आकांक्षा रखते हुए भी आध्यात्मिक रहा जा सकता है।

दृढ़ रहें, लेकिन सोच को खुला रखें

भय के बावजूद अपने पक्ष में खड़े होने के सवाल पर गुरुदेव ने दृढ़ता और लचीलेपन का संतुलन समझाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने पक्ष में खड़ा होना चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी सोच को खुला भी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा तर्क हमारे ज्ञान पर आधारित होता है और ज्ञान सीमित होता है। जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता है, हमारी दृष्टि भी बदलती है। इसलिए वर्तमान समझ के आधार पर दृढ़ रहें, लेकिन नए ज्ञान के लिए मन खुला रखें।

लगातार उपलब्धियां हासिल करने के दबाव से जूझ रही जेन जी के लिए महत्वाकांक्षा और मानसिक शांति के संतुलन पर गुरुदेव ने एक शब्द में जवाब दिया—“ध्यान।”

माता-पिता से टकराव नहीं, संवाद जरूरी

माता-पिता और बच्चों के रिश्ते पर युवाओं ने पूछा कि अपनी इच्छाओं को बिना रिश्ते खराब किए कैसे व्यक्त किया जाए। गुरुदेव ने टकराव के बजाय समझौते और आपसी सहयोग का रास्ता सुझाया। उन्होंने कहा—“कभी उनकी, कभी आपकी।”

उन्होंने युवाओं को मुस्कुराते हुए माता-पिता से यह कहने का सुझाव दिया कि पिछली बार उनकी बात मान ली थी, इस बार वे आपकी बात मान लें। इसे उन्होंने मजाकिया अंदाज में “ब्राउनी पॉइंट” बताया।

आध्यात्मिकता और सफलता में कोई विरोध नहीं

धन, सफलता और आध्यात्मिकता के संबंध पर गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार आध्यात्मिकता व्यक्ति को परिस्थितियों का सामना करने, अंतर्ज्ञान विकसित करने और असफलताओं से उबरकर आगे बढ़ने की क्षमता देती है। साथ ही महत्वाकांक्षा को नैतिक दिशा भी देती है।

उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति नहीं चाहता कि उसके साथ छल हो, तो उसे भी दूसरों के साथ छल नहीं करना चाहिए।

नौकरी और जुनून के बीच संतुलन

जेन जी के बीच आम दुविधा—जुनून के पीछे जाएं या अधिक वेतन वाली नौकरी चुनें—पर गुरुदेव ने व्यावहारिक सलाह दी। उन्होंने कहा कि जुनून कोई नहीं छीन सकता, जबकि अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी पाना कठिन हो सकता है। इसलिए अच्छी नौकरी के साथ अपने जुनून को भी जारी रखा जा सकता है।

भक्ति संगीत पर झूमे युवा

संवाद के बाद कार्यक्रम उत्सव में बदल गया। फैशन शो में युवाओं ने रचनात्मकता और अपनी विशिष्ट शैली का प्रदर्शन किया। इसके बाद निरवाना स्टेशन के साथ आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ ने माहौल को और जीवंत बना दिया। आधुनिक बीट्स के साथ भक्ति संगीत का संगम हुआ और युवा गीतों पर गाते-थिरकते नजर आए।

कार्यक्रम में आध्यात्मिकता और पॉप संस्कृति, महत्वाकांक्षा और आंतरिक शांति तथा जिज्ञासा और उत्सव का अनूठा मेल देखने को मिला। गुरुदेव के साथ संवाद ने युवाओं को केवल सवालों के जवाब ही नहीं दिए, बल्कि स्वयं को समझने और जीवन को अपनी सहजता के साथ अपनाने की प्रेरणा भी दी।

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