अंतर्जातीय विवाह से सामाजिक समरसता को मिलेगा नया संदेश, 27 अगस्त को ‘मधु-हर सम्मान’
राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी होंगे मुख्य अतिथि, सुभारती विश्वविद्यालय में होगा समारोह
मेरठ। सामाजिक समरसता, समानता, पारिवारिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से सनातन संगम न्यास एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 27 अगस्त को ‘मधु-हर सम्मान’ समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में होगा, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (औद्योगिक विकास एवं संसदीय कार्य) जसवंत सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
समारोह के लिए ऐसे दंपतियों से नामांकन आमंत्रित किए गए हैं, जिन्होंने अपने पुत्र या पुत्री का सवर्ण एवं अनुसूचित वर्ग के बीच अंतर्जातीय विवाह कराकर सामाजिक एकता, पारिवारिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दिया है। आयोजकों के अनुसार अभियान को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्साह है और बड़ी संख्या में नामांकन प्राप्त हुए हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं सनातन संगम न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना समरसता, समानता और सभी के सम्मान में निहित है। जातिगत भेदभाव और रूढ़ियों से ऊपर उठकर परिवारों को जोड़ने वाले लोगों का सम्मान करना आने वाली पीढ़ियों के सामने सकारात्मक आदर्श प्रस्तुत करना है।
उन्होंने कहा कि ‘मधु-हर सम्मान’ उन परिवारों के सम्मान का प्रयास है, जिन्होंने सामाजिक दबाव और रूढ़ियों से ऊपर उठकर प्रेम, समानता और मानवीय गरिमा को प्राथमिकता दी। ऐसे परिवार समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। अभियान का उद्देश्य किसी वर्ग के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी वर्गों के बीच सम्मान, आत्मीयता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
मधुवरस और हरलय्या की स्मृति में सम्मान
आयोजकों के अनुसार ‘मधु-हर सम्मान’ का आधार वर्ष 1156 में कर्नाटक के कल्याण राज्य से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना है। सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देने के लिए ब्राह्मण वर्ण के मधुवरस और मोची समाज के हरलय्या ने अपने बच्चों का अंतर्जातीय विवाह कराया था। सामाजिक रूढ़ियों और विरोध के बावजूद दोनों ने समानता के लिए संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया।
इन्हीं समाज सुधारकों की स्मृति और उनके समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘मधु-हर सम्मान’ की शुरुआत की गई है। आयोजकों का कहना है कि यह सम्मान उन परिवारों को सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में पहचान देने का प्रयास है, जो जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों और समानता के आधार पर रिश्तों को स्वीकार करते हैं।
सनातन संगम न्यास, मेरठ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव ने कहा कि अंतर्जातीय विवाह को केवल दो व्यक्तियों के विवाह के रूप में नहीं, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक समूहों को जोड़ने वाले सेतु के रूप में देखा जाना चाहिए। सामाजिक रूढ़ियों से ऊपर उठकर बच्चों के निर्णय का सम्मान करने वाले परिवार सामाजिक परिवर्तन की नींव मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार का विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि सभी वर्गों के बीच सम्मान, संवाद और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने समाज के अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
न्यास के संयोजक अनिल अज्ञात, सचिव मनीष पाठक, कोषाध्यक्ष पराग गुप्ता और प्रभारी विवेक सोम ने भी समाज के सभी वर्गों से ‘मधु-हर सम्मान’ एवं जन-जागरूकता अभियान से जुड़ने की अपील की। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि 27 अगस्त का समारोह सामाजिक समरसता, समानता और सामाजिक सौहार्द का संदेश मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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