‘तो फिर सड़कों पर उतरेंगे कॉकरोच’, CJP का सरकार को अल्टीमेटम
FIR वापस लेने, हिरासत में लिए गए युवाओं की रिहाई और 28 जुलाई तक लिखित समझौते की मांग; मांगें नहीं मानीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली, 27 जुलाई। कथित नीट पेपर लीक के खिलाफ 37 दिनों तक चले आंदोलन को वापस लेने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर केंद्र सरकार को अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि आंदोलन समाप्त कराने के दौरान सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया जा रहा है। CJP ने हिरासत में लिए गए छात्रों और प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और 28 जुलाई तक कानूनी सुरक्षा से संबंधित लिखित समझौते की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर पार्टी ने देशभर में फिर से प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को संबोधित सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने के संबंध में हुए समझौते का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों पर नजर रखे जाने तथा उन्हें परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
रांका ने कहा कि CJP की मांग है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं और हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों तथा अन्य प्रदर्शनकारियों की कथित गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार से हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई और एफआईआर वापस लेने की अपील की। दास ने कहा कि संगठन ने सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद ही अपना देशव्यापी विरोध समाप्त किया था।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की कानूनी टीम संबंधित राज्यों के वकीलों के साथ समन्वय कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन या बदले की कार्रवाई न की जाए और आंदोलन के दौरान किए गए आश्वासनों का सम्मान किया जाए।
बताया गया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को CJP ने अपना आंदोलन वापस लिया था। संगठन का दावा है कि उस समय सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने, पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने और पेपर लीक के खिलाफ कानून लाने समेत कई मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था।
अब CJP ने सरकार को 28 जुलाई तक का समय देते हुए कहा है कि यदि हिरासत में लिए गए युवाओं की रिहाई, एफआईआर वापसी और लिखित समझौते की मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में फिर से विरोध-प्रदर्शन शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों और समझौते की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।


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