आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत, 38 इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक
मुरादाबाद कमिश्नर ने रामपुर डीएम के ध्वस्तीकरण आदेश पर लगाई रोक, यूनिवर्सिटी की अपील पर अंतिम फैसला आने तक जारी रहेगी रोक
रामपुर, 27 जुलाई। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है। यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 38 इमारतों को ध्वस्त करने के रामपुर के जिलाधिकारी के आदेश पर मुरादाबाद के कमिश्नर ने रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया। इसके साथ ही फिलहाल यूनिवर्सिटी परिसर में बुलडोजर कार्रवाई का रास्ता रुक गया है।
जानकारी के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी की कुल 40 इमारतों में से 38 को जांच के बाद अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा गया था। इसके बाद रामपुर प्रशासन की ओर से इन भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था। कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र यूनिवर्सिटी के बाहर जुट गए और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत कार्रवाई की गई थी। विस्तृत सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था।
यूनिवर्सिटी की अपील के बाद अब मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर ने रामपुर डीएम के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से राहत मिल गई है।
आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है जौहर यूनिवर्सिटी
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को आजम खान का महत्वाकांक्षी और ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। यूनिवर्सिटी की स्थापना 18 सितंबर 2006 को की गई थी। हालांकि, उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं थी, जिसके चलते इसका उद्घाटन नहीं हो सका। वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार बनने और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद 18 सितंबर 2012 को यूनिवर्सिटी का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
बताया गया कि यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय रामपुर विकास प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं था और क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन आता था। आरोप है कि शुरुआती दो भवनों के निर्माण के लिए जिला पंचायत से अनुमति ली गई, जबकि बाद में निर्मित 38 भवनों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
पहले भी विवादों में रही है यूनिवर्सिटी
जौहर यूनिवर्सिटी पहले भी जमीन से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा में रही है। वर्ष 2021 में यूनिवर्सिटी से जुड़ी 70 हेक्टेयर से अधिक जमीन सरकार द्वारा वापस लिए जाने की कार्रवाई की गई थी। इस मामले में आजम खान की ओर से दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद जमीन सरकार के नियंत्रण में चली गई थी।
फिलहाल, 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन को राहत मिली है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील पर होने वाली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन भवनों के संबंध में अंतिम निर्णय क्या होता है।


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