भू-राजस्व अभिलेखों से होगा गन्ना क्षेत्रफल का मिलान, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

लखनऊ, 25 जुलाई। प्रदेश में गन्ना सर्वेक्षण और सट्टा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) पोर्टल पर दर्ज गन्ना क्षेत्रफल का भू-राजस्व अभिलेखों से एपीआई के माध्यम से सत्यापन शुरू किया है। इस व्यवस्था से फर्जी और त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर अंकुश लगाने के साथ वास्तविक किसानों को लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

गन्ना आयुक्त के निर्देश पर शनिवार को न्यू स्कॉलर हॉस्टल सभागार में अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और देवरिया परिक्षेत्र के अधिकारियों एवं फील्ड कार्मिकों के लिए वर्चुअल प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना विकास निरीक्षक, सचिव और गन्ना पर्यवेक्षकों को डाटा सत्यापन, तकनीकी प्रक्रिया और राजस्व अभिलेखों से मैपिंग की विस्तृत जानकारी दी गई।

विभाग के अनुसार अभियान के पहले चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्रफल वाले किसानों के आंकड़ों का सत्यापन किया जाएगा। इससे बड़े क्षेत्रफल के नाम पर फर्जी प्रविष्टियां करने वाले तत्वों पर प्रभावी रोक लगेगी तथा गन्ना माफियाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

सत्यापन के बाद केवल वास्तविक और पात्र किसानों का गन्ना क्षेत्रफल ही स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर दर्ज रहेगा। इससे गन्ना आपूर्ति, सर्वेक्षण, सट्टा निर्धारण और भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा विभाग के प्रति किसानों का विश्वास मजबूत होगा।

अभियान के दौरान किसानों को गन्ना सर्वे और सट्टा से जुड़े 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी भी दी जाएगी। यदि किसी किसान को सर्वे या सट्टा संबंधी कोई आपत्ति होगी तो उसका मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा, जिससे किसानों को विभागीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

गन्ना आयुक्त ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों और जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा। विभाग का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से गन्ना सर्वेक्षण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और किसान हितैषी बनाना है, ताकि वास्तविक गन्ना किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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