अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट
दोषियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, मौत की सजा और उम्रकैद बरकरार
अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य की आजीवन कारावास की सजा में राहत देने से इनकार कर दिया। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 246 लोग घायल हुए थे।
अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह भुगतान 31 मार्च, 2027 तक पूरा करना होगा।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इसके दो दिन बाद सूरत में भी कई बम बरामद किए गए थे। मामले की जांच के दौरान शहर की क्राइम ब्रांच ने 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 78 के खिलाफ मुकदमा चलाया गया।
फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 28 को बरी कर दिया था। बरी किए गए आरोपियों में मुबीन शेख और मंसूर पीरभॉय भी शामिल थे। उन पर साजिश रचने और धमाकों की जिम्मेदारी लेते हुए धमकी भरे ईमेल भेजने का आरोप था। मामले में एक सरकारी गवाह (अप्रूवर) को माफी दी गई थी, जबकि बयान से मुकरने वाले चार अन्य अप्रूवर को दोषी ठहराया गया था।


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