वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय में ‘सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व’ पर तीन दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम शुरू
एआई विशेषज्ञों के छह सत्रों में पर्यावरण, कृषि, खाद्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर होगा मंथन
मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में वरिष्ठ छात्र-छात्राओं को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व’ (एआई फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट) विषय पर तीन दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम एवं कार्यशाला का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। 28 से 30 जुलाई तक चलने वाले इस कार्यक्रम में छह सत्रों के दौरान देश के आधा दर्जन से अधिक एआई विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।
उद्घाटन सत्र में दिल्ली से आए विख्यात साइबर एक्सपर्ट एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. नील ने विद्यार्थियों को एआई के प्रभावी और सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने साइबर फ्रॉड से बचाव, संवेदनशील डेटा की सुरक्षा, निजता एवं गोपनीयता की रक्षा के साथ-साथ कृषि, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
विश्वविद्यालय के डॉ. सीवी रमन सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता डॉ. नील, प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्ण कान्त दवे, प्रतिकुलपति डॉ. मानस रंजन, डॉ. नीतू पंवार और डॉ. एसके श्रीवास्तव ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य वक्ता डॉ. नील ने कहा कि व्यक्तिगत विकास के साथ राष्ट्र निर्माण में भी एआई का सटीक और जिम्मेदार उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार की रोकथाम, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन, महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण तथा निजता और गोपनीयता की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युवा तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
वेंक्टेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि ने कहा कि एआई के तेजी से बढ़ते वैश्विक प्रभाव को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी व्यक्तिगत विकास के साथ राष्ट्र निर्माण में भी प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।
प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का सफर नहीं है, बल्कि आत्मखोज, नवाचार और शोध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण से जुड़ने का सबसे सशक्त मंच है। वहीं कुलपति प्रो. कृष्ण कान्त दवे ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने युवाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोले हैं। विद्यार्थियों को एआई का बेहतर उपयोग करते हुए स्वयं को निरंतर अपग्रेड करना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना सकें।
कार्यशाला के आगामी सत्रों में पर्यावरण एवं जलवायु संतुलन, आपदा प्रबंधन, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, सुदृढ़ ट्रैफिक व्यवस्था, डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. एसके श्रीवास्तव, डॉ. नीतू पंवार, डॉ. राजवर्द्धन सिंह, डॉ. योगेश्वर शर्मा, डॉ. अश्विन सक्सेना, डॉ. ओमप्रकाश गोसाई, डॉ. रीना जोशी, दीक्षा सिंह, डॉ. अंजलि भारद्वाज, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. बवीता, अखिल, अनुज, हुमा, संजीव, अलीशा, हरप्रीत, शोएब, जुबेर सहित मेरठ परिसर के निदेशक डॉ. पंकज चौधरी और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा मौजूद रहे।




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