सुभारती लॉ कॉलेज में ‘विधिक पेशेवर नैतिकता एवं सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग’ पर जागरूकता सत्र
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विधिक पेशेवर नैतिकता बनाए रखने’ विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, व्यावसायिक नैतिकता तथा भारतीय बार काउंसिल के दिशा-निर्देशों के प्रति जागरूक करना था।
यह जागरूकता सत्र सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति माननीय राजेश चन्द्र के निर्देशन तथा संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
अपने संबोधन में माननीय राजेश चन्द्र ने कहा कि अधिवक्ता का आचरण उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा और न्यायपालिका की मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने भारतीय बार काउंसिल के नियमों के भाग-6, अध्याय-2 में उल्लिखित ‘व्यावसायिक आचरण एवं शिष्टाचार के मानक’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक अधिवक्ता को न्यायालय के अधिकारी, समाज के सम्मानित सदस्य और एक सज्जन व्यक्ति के रूप में अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया पर भी इसी मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन करने का आह्वान किया।
प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई ने कहा कि भारत में विधिक व्यवसाय केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक गरिमामय, विद्वतापूर्ण और उत्तरदायित्वपूर्ण पेशा है। अधिवक्ता न्यायालय के अधिकारी होने के साथ-साथ न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ भी होता है। ऐसे में डिजिटल मंचों पर उसका आचरण उसकी पेशेवर पहचान और विश्वसनीयता का परिचायक बनता है।
सत्र के दौरान श्री हर्षित एवं श्री आशुतोष देशवाल ने विद्यार्थियों को न्यायालय परिसर, न्यायिक कार्यवाही, अधिवक्ताओं के चैंबर और इंटर्नशिप से संबंधित गतिविधियों की रील, वीडियो अथवा सनसनीखेज सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने इंटर्नशिप के दौरान गोपनीयता बनाए रखने, डिजिटल आचरण में जिम्मेदारी निभाने और पेशेवर नैतिक मूल्यों का पालन करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार निर्धारित अंडरटेकिंग भी भरी।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्र, डॉ. सारिका त्यागी, डॉ. आफरीन अल्मास, शालिनी, डॉ. अंजुम जहां, सोनल जैन, अरशद आलम, शिवानी, पार्थ एवं अनुराग सहित लॉ कॉलेज के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विधि विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
जागरूकता सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि एक सफल अधिवक्ता की पहचान केवल उसके विधिक ज्ञान से नहीं, बल्कि उसके नैतिक आचरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और डिजिटल माध्यमों पर जिम्मेदार व्यवहार से भी होती है।


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