वर्षा जल संरक्षण जरूरी
इलमा अज़ीम
पानी की समस्या ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से गंभीर होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां तालाब, आहर, पइन आदि के रूप में इसके समाधान के उपाय उपलब्ध हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण का कोई सटीक उपाय नहीं सूझता। दिल्ली जैसे शहरों में सरकार या समाज तालाब बनाए तो बनाए कहां, अपार्टमेंट में रहने वाले लोग तो स्वीमिंग पुल ही बनाएंगे जो पानी का संरक्षण करने की बजाय अपव्यय ही करता है।
बड़े-बड़े अपार्टमेंटों से भरे कंक्रीट के इन जंगलों में जल-संरक्षण कैसे किया जाए? हालांकि कुछ लोग इस दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। मसलन भवन निर्माण के क्षेत्र से जुड़े एक समूह ने भवनों व फ्लैटों में वर्षा जल के संचयन हेतु आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया है और आवासीय परिसर में वर्षा जल संरक्षण की पूरी व्यवस्था की है। इसके लिए पूरे परिसर को तीन क्षेत्रों में बांटा गया है। पूरे क्षेत्र में होने वाली वर्षा के जल को संग्रहित करने के लिए ‘नेचर पार्क’ और उद्यान बनाए गए हैं ताकि भूमि का जल वाष्पीकरण तथा अन्य कारणों से बर्बाद न हो। प्रत्येक क्षेत्र में जगह-जगह रेत व धातु से निर्मित गङ्ढे बनाए गए हैं, जो जमीन के नीचे व ऊपर दोनों जगह हैं। वर्षा जल संचय के लिए इन गङ्ढों को फ्लैटों की छतों व सतहों से पाईपलाइनों से जोड़ा गया है।
इस प्रकार वर्षा जल को ‘पम्प’ में संग्रहित किया जाता है। इस जल को वृक्षारोपण और भू-जलस्तर बढ़ाने में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस जल को समय पड़ने पर बागवानी, गाड़ी साफ करने जैसे अन्य कार्यों में भी इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल भूजल की सहज व सस्ती उपलब्धता उसके अधिक उपयोग को प्रेरित करती है।
कृषि वैज्ञानिकों को ऐसी फसलों के लिये अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा, जो ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों के बावजूद अधिक तापमान व कम पानी में अधिक उपज दे सकें। नीति-नियंताओं को गंभीरता से सोचना होगा कि पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रही खेती को कैसे लाभकारी बनाया जाए। यदि भूजल का यह संकट भविष्य में और गहराता है तो यह असंतोष का वाहक ही बनेगा। हमें बदलते मौसम के अनुकूल ही अपनी रीतियां-नीतियां बनानी होंगी। साथ ही पूरे देश में पानी के उपयोग के लिये अनुशासन की भी जरूरत होगी। अब चाहे हम नागरिक के रूप में हों, उद्योग व अन्य क्षेत्र में, पानी का किफायती उपयोग आने वाले भूजल संकट से हमारी रक्षा कर सकता है। यह एक गंभीर समस्या है और सरकार व समाज की सक्रिय भागीदारी इस चुनौती से मुकाबले के लिये जरूरी होगी।





No comments:
Post a Comment