पार्श्वनाथ डेवलपर्स को सुप्रीम कोर्ट की अंतिम चेतावनी
एक सप्ताह में भुगतान नहीं किया तो होगी जेल
नई दिल्ली, 20 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के घर खरीदारों के बकाया भुगतान के मामले में पार्श्वनाथ डेवलपर्स को कड़ी चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के भीतर संपूर्ण राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन नहीं होने पर कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना से जुड़े घर खरीदारों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने घर खरीदारों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी आवास खरीदने में लगा दी, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल सका। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाओं से व्यवस्था का मजाक बनाया गया है।
पीठ ने आदेश दिया कि कंपनी एक सप्ताह के भीतर पूरी देय राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जारी गैर-जमानती वारंट और बैंक खातों को फ्रीज करने संबंधी आदेश फिलहाल प्रभावी रहेंगे।
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दिवालियापन और अतिरिक्त समय देने की दलील दी गई, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगला आदेश जेल भेजने का होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए कंपनी की संपत्तियों की नीलामी कर घर खरीदारों का भुगतान सुनिश्चित किया जा सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कंपनी और उसके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुका है।


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