हीमोफीलिया मरीज को नई जिंदगी: मेडिकल कॉलेज में सफल कूल्हा प्रत्यारोपण
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग ने हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज का अत्यंत जटिल बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी (कूल्हा प्रत्यारोपण) सफलतापूर्वक कर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हापुड़ के दयानतपुर निवासी महेश, जिनके बाएं कूल्हे की हड्डी (फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर) टूट गई थी, का विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफल ऑपरेशन किया।
महेश को गंभीर दर्द की स्थिति में देव नंदिनी हॉस्पिटल, हापुड़ से एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। विस्तृत जांच और विशेष तैयारियों के बाद चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया।
हीमोफीलिया के मरीजों में रक्त का थक्का बनने में कठिनाई होती है, जिससे सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है। इसे देखते हुए ऑपरेशन से पहले हीमैटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिंह की सलाह पर आवश्यक फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सकी।
ऑपरेशन का नेतृत्व मेडिकल कॉलेज के उप-प्राचार्य एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक ने किया। उनके साथ डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. सनव्वर अली और ऑर्थोपेडिक टीम ने सर्जरी की, जबकि एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश मणिक, डॉ. प्रमोद चंद एवं उनकी टीम ने अहम भूमिका निभाई।
चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। जल्द ही फिजियोथेरेपी के माध्यम से वह सामान्य जीवन की ओर लौट सकेगा।
डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक ने कहा कि हीमोफीलिया मरीजों का ऑपरेशन विशेष सावधानी, आधुनिक तकनीक और बहु-विषयक विशेषज्ञों के समन्वय से ही सफल हो सकता है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों की तुलना में यह जटिल ऑपरेशन सरकारी मेडिकल कॉलेज में बेहद कम खर्च पर किया गया, जिससे मरीज को किफायती दर पर उच्च गुणवत्ता का उपचार उपलब्ध हो सका।


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