मेरठ में मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम का बड़ा फर्जीवाड़ा
डॉक्टरों के फर्जी लेटर पैड और मोहर से बनाते थे दस्तावेज, आरोपी गिरफ्तार
मेरठ। मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले एक आरोपी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी डॉक्टरों और अस्पतालों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इंश्योरेंस कंपनियों से मेडिकल क्लेम पास कराने का काम करता था। पुलिस ने उसके कब्जे से कई अस्पतालों के फर्जी लेटर पैड, डॉक्टरों की मोहरें, नकली हस्ताक्षर वाले ओपीडी पर्चे और भुगतान से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस अब इस पूरे मामले के नेटवर्क की जांच में जुटी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने अब तक कितने फर्जी क्लेम कराए और इस फर्जीवाड़े में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
वरिष्ठ डॉक्टर की शिकायत से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
मामले का खुलासा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जगदीप सिंहल की शिकायत के बाद हुआ। आरोप है कि उनके नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम हासिल किए जा रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, 24 मार्च 2026 को एक निजी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की प्रतिनिधि ने डॉ. सिंहल से फोन पर संपर्क किया। प्रतिनिधि ने व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें मेडिकल क्लेम से जुड़े कुछ दस्तावेज भेजे। इनमें उनके नाम की ओपीडी पर्ची और फीस की रसीद भी शामिल थी।
दस्तावेज देखकर डॉ. सिंहल हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि वह संबंधित अस्पताल में कभी गए ही नहीं थे और न ही उन्होंने वहां किसी मरीज का इलाज किया था। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से की। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
आरोपी के पास से मिले फर्जी लेटर पैड और मोहरें
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी डॉ. दीपक गुप्ता पुत्र स्वर्गीय प्रेम सागर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से कई अस्पतालों के लेटर पैड, बड़ी संख्या में फर्जी ओपीडी पर्चियां, सात डॉक्टरों की मोहरें, दो अस्पतालों की मोहरें और भुगतान से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम कराने का काम करता था। बरामद दस्तावेजों और अन्य सामान को कब्जे में लेकर पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
कितने फर्जी क्लेम हुए, पुलिस खंगाल रही रिकॉर्ड
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरीके से अब तक कितने फर्जी इंश्योरेंस क्लेम कराए। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने डॉक्टरों और अस्पतालों के नाम व दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया और किन-किन बीमा कंपनियों को इससे नुकसान हुआ।
पुलिस बरामद दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों से रिकॉर्ड जुटा रही है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।


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