हुनर को मिले नए औजार तो रोजगार ने भरी तेज उड़ान
मेरठ। पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना मेरठ के कारीगरों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोल रही है। योजना के तहत जिले के बढ़ई, लोहार, सुनार, दर्जी, कुम्हार, मोची, नाई, राजमिस्त्री, हलवाई समेत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इस वर्ष जिले में 1500 कारीगरों को प्रशिक्षण के बाद टूलकिट वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
फिलहाल योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है। चयनित कारीगरों को उनके व्यवसाय से संबंधित आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, नई तकनीकों के इस्तेमाल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और उद्यमिता विकास की जानकारी भी दी जाएगी।
आधुनिक उपकरणों से बढ़ेगी कार्यक्षमता
प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को उनके कार्य के अनुरूप आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग का मानना है कि बेहतर उपकरण मिलने से कारीगरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और वे बाजार की प्रतिस्पर्धा में बेहतर तरीके से अपनी पहचान बना सकेंगे।
योजना का सकारात्मक असर मेरठ में पहले ही देखने को मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 1250 पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक टूलकिट वितरित की गई थी। इसके अलावा पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण से जोड़कर स्वरोजगार शुरू करने और कारोबार विस्तार में भी सहायता दी गई।
आय बढ़ाने और बाजार तक पहुंचाने में मददगार
आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता मिलने से कई कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है। साथ ही उनके उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में मांग भी बढ़ी है। विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक पारंपरिक कारीगर आधुनिक तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भर बनें और अपने हुनर को बड़े बाजार तक पहुंचा सकें।
1500 कारीगरों को जोड़ने का लक्ष्य
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र ने इस वर्ष भी योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र कारीगरों तक पहुंचाने की तैयारी की है। इच्छुक अभ्यर्थी विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, मेरठ के उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों के कौशल को आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में 1250 कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराई गई थी और पात्र लाभार्थियों को मुद्रा ऋण से भी जोड़ा गया था।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में 1500 कारीगरों को टूलकिट वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने पात्र कारीगरों से समय रहते ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ उठाने की अपील की।


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