वेतन कटौती के विरोध में बिजली संविदाकर्मियों का धरना
एसई कार्यालय घेरा, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और बकाया भुगतान की मांग
मेरठ। वेतन कटौती और अन्य समस्याओं को लेकर बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों ने बुधवार को निविदा संविदा कर्मचारी सेवा समिति के बैनर तले अधीक्षण अभियंता (एसई) कार्यालय पर धरना दिया। कर्मचारियों ने कंपनी और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शोषण का आरोप लगाया और समस्याओं के समाधान की मांग की।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कार्यक्षेत्र बढ़ाने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है, जिससे काम का दबाव बढ़ गया है और हादसों का खतरा भी बना हुआ है। इसके अलावा कम वेतन के बावजूद मनमाने तरीके से कटौती की जा रही है और कई कर्मचारियों का भुगतान भी रोका गया है।
36 से अधिक कर्मचारियों के वेतन में कटौती का आरोप
कर्मचारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्र के बिजलीघरों में करीब 456 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 36 से अधिक कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है। उनका आरोप है कि फेशियल अटेंडेंस मशीन के आधार पर वेतन काटा जा रहा है, जबकि कई मामलों में एसडीओ की संस्तुति के बाद भी कर्मचारियों को राहत नहीं दी गई।
उन्होंने बताया कि आईटीआई पास संविदा कर्मचारियों को करीब 14 हजार रुपये और बिना आईटीआई वाले कर्मचारियों को करीब 11 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। इसके बावजूद कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से कटौती की जा रही है। पिछले तीन माह से 13 कर्मचारियों का वेतन रोके जाने का भी आरोप लगाया गया।
कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
कर्मचारियों ने मांग की कि बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए, वेतन कटौती पर रोक लगाई जाए और कार्य व्यवस्था में सुधार किया जाए। उन्होंने संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठाई।
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि कई बार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
धरने के बाद अधीक्षण अभियंता ने कर्मचारी नेताओं से वार्ता की और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।


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