चढ़ावे की सुरक्षा पर मंदिरों का फोकस, दान व्यवस्था में बड़े बदलाव

बदरीनाथ विवाद के बाद बढ़ी चौकसी, जेब रहित कुर्ते, सीसीटीवी निगरानी और रसीद प्रणाली पर जोर

नयी दिल्ली। देश के कई प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे और दानराशि में कथित गड़बड़ी के मामलों के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन अब दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में जुट गया है। अयोध्या से लेकर बदरीनाथ तक सामने आए विवादों के बाद उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों ने सुरक्षा और निगरानी के नियम सख्त कर दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास पर कोई आंच न आए।

सबसे अधिक चर्चा बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की धनराशि में कथित हेराफेरी के आरोपों की रही। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पहले आंतरिक जांच शुरू की, फिर एक कर्मचारी को निलंबित किया। मंदिर अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति भी पूरे मामले की जांच कर रही है।

मनसा देवी मंदिर में लागू हुए नए नियम

बदरीनाथ विवाद के बाद हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर प्रशासन ने दान व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। मंदिर में ड्यूटी करने वाले पुजारियों के कुर्तों में जेब नहीं होगी, ताकि व्यक्तिगत रूप से नकदी रखने की आशंका समाप्त हो सके। इसके अलावा दानपात्रों की निगरानी बढ़ाई गई है और पूरे परिसर में सीसीटीवी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। चढ़ावे की प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी तय किया है कि कोई भी पुजारी महिला श्रद्धालुओं के सिर या माथे पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं देगा।

हर की पौड़ी की व्यवस्था बनी उदाहरण

हरिद्वार की हर की पौड़ी पर पहले से लागू पारदर्शी दान व्यवस्था अब मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। यहां स्थायी दानपात्र नहीं रखे जाते। श्रद्धालुओं से प्राप्त प्रत्येक दान की अधिकृत रसीद जारी की जाती है। गंगा सभा और सेवा समितियां भी रसीद के माध्यम से ही सहयोग राशि एकत्र करती हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दान देते समय अधिकृत रसीद अवश्य लें।

राजनीति तक पहुंचा मामला

बदरीनाथ चढ़ावा विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि चढ़ावे में हेराफेरी आस्था के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्थाओं का उद्देश्य केवल वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना भी है।    

  • चढ़ावे पर अब सख्त निगरानी, मंदिरों ने बदले नियम
  • दान रहेगा सुरक्षित, मंदिरों में लागू हुई नई व्यवस्था
  • चढ़ावा विवाद के बाद जागे मंदिर, सुरक्षा और पारदर्शिता पर बढ़ा जोर
  • मंदिरों में बदले दान के नियम, जेब रहित कुर्तों से रसीद सिस्टम तक नई पहल

                                                        

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