बाल श्रम: सामूहिक प्रयास जरूरी
राजीव त्यागी
बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में सोमवार को मेरठ में श्रम विभाग, जनहित फाउंडेशन और थाना एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) की संयुक्त टीम ने व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। शास्त्रीनगर, हापुड़ रोड और लोहियानगर क्षेत्र में विभिन्न प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण के दौरान बाल श्रम में लगे 5 बच्चों को मुक्त कराया गया।
यह अभियान हमेशा चलाए जाते हैं और बाल मजदूरों को मुक्त कराया जाता है। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है, जो चिंता का विषय है। दरअसल भारत में बाल मजदूरी की समस्या सदियों से चली आ रही है। कहने को भारत देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। फिर भी बच्चों से बाल मजदूरी कराई जाती है। जो दिन बच्चों के पढने, खेलने और कूदने के होते हैं, उन्हें बाल मजदूर बनना पडता है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
कहने को सरकारें बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बडे-बडे वायदे और घोषणाएं करती हैं, फिर भी होता सिर्फ ढाक के वही तीन पात है। इतनी जागरूकता के बाद भी भारत देश में बाल मजदूरी का खात्मा दूर-दूर तक नहीं दिखता है। इसके उल्ट बाल मजदूरी दिन व दिन बढती जा रही है। जो गरीब बच्चियां होती हैं उनको पढने भेजने की जगह घर में ही बाल श्रम कराया जाता है। छोटे-छोटे गरीब बच्चे स्कूल छोड़कर बाल-श्रम हेतु मजबूर हैं।
वर्तमान में भारत देश में कई जगहों पर आर्थिक तंगी के कारण माँ-बाप ही थोड़े पैसों के लिए अपने बच्चों को ऐसे ठेकेदारों के हाथ बेच देते हैं, जो अपनी सुविधानुसार उनको होटलों, कोठियों तथा अन्य कारखानों आदि में काम पर लगा देते हैं। कई बार श्रम करते-करते बच्चों को यौन शोषण का शिकार भी होना पड़ता है। एक तरह से बाल श्रमिक का जीवन जीते जी नरक बन जाता है। अपने अधिकारों से वंचित बच्चों को अधिकार दिलाने के लिये समाज और देश को सामूहिक प्रयास करने होंगे। आज देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे।





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