डबल वोटर लिस्ट के सहारे पंचायत चुनाव जीतने का मामला: हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब

नैनीताल, 20 जुलाई। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोहरी मतदाता सूची (डबल वोटर लिस्ट) के आधार पर पंचायत चुनाव लड़ने और जीतने वाले प्रत्याशियों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति सिंह बर्थवाल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है।

अदालत ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन सभी निर्वाचित प्रत्याशियों का विवरण प्रस्तुत करे, जिनके नाम नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज थे तथा जिन्होंने पंचायत चुनाव जीतकर जनप्रतिनिधि का पद प्राप्त किया है।

मामले की पृष्ठभूमि में पंचायत चुनाव से पूर्व राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वह स्पष्टीकरण है, जिसमें दोहरी मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इस निर्णय को उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

पूर्व में हाईकोर्ट आयोग के इस स्पष्टीकरण पर अंतरिम रोक लगा चुका है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। साथ ही यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा अपनाया गया दृष्टिकोण कानून के अनुरूप है।

अब पंचायत चुनाव संपन्न होने और संबंधित प्रत्याशियों के निर्वाचित हो जाने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के अंतिम निस्तारण की प्रक्रिया तेज कर दी है। अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को यह भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि क्या इस मामले में चुनाव जीत चुके प्रत्याशियों को भी पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है, ताकि सभी प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सके।

मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। इस प्रकरण पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि अदालत का अंतिम फैसला पंचायत चुनावों की वैधता और निर्वाचन प्रक्रिया पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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