जल निकासी के दावे फेल, शहर की सड़कें बनीं तालाब
दो फीट तक जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, निर्माणाधीन सड़कों पर बढ़ा हादसों का खतरा
मेरठ। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। नालों के ओवरफ्लो होने से कई प्रमुख बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में करीब दो फीट तक पानी भर गया। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
खैर नगर, भूमिया का पुल, लक्ष्मणपुरी, तारापुरी, शारदा रोड, रेलवे रोड, घंटाघर, थापर नगर, सोतीगंज, लालकुर्ती पैठ बाजार, हड़िया मोहल्ला, फव्वारा चौक, रजबन बाजार, जाकिर कॉलोनी, भगत सिंह मार्केट, प्रहलाद नगर, गोला कुआं, शास्त्री नगर, जागृति विहार, बुढ़ाना गेट, वेस्ट एंड रोड, ईस्टन कचहरी रोड और सूरजकुंड रोड सहित अनेक क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रही। कई इलाकों में घंटों तक पानी जमा रहने से यातायात बाधित रहा।
सबसे अधिक परेशानी उन स्थानों पर हुई, जहां सीएम ग्रेड योजना के तहत सड़क निर्माण और खुदाई का कार्य चल रहा है। बारिश के पानी में गड्ढे पूरी तरह ढक जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग सका। इसके चलते कई दोपहिया और चारपहिया वाहन गड्ढों में फंस गए तथा फिसलने से कई वाहन चालक घायल हो गए।
लगातार जलभराव के कारण बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों के इंजन बंद हो गए। वाहन चालकों को पानी के बीच घंटों तक अपने वाहन धकेलकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा। वहीं बाजारों में जलभराव से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित रहीं और पैदल राहगीरों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून से पहले नालों और नालियों की समुचित सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। लोगों ने प्रशासन से जल निकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने, निर्माणाधीन सड़कों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने तथा हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।


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