मोदी के बाद क्या 2047 तक कायम रहेगी भाजपा की राजनीतिक बढ़त?

डॉ. अतुल मलिकराम का विश्लेषण: परिसीमन, नेतृत्व परिवर्तन और नई पीढ़ी तय करेगी भविष्य

नई दिल्ली। वर्ष 2047 भारत की आजादी का शताब्दी वर्ष होगा और इसी के साथ देश की राजनीति भी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी होगी। राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद भी अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रख पाएगी।

डॉ. मलिकराम के अनुसार, वर्ष 2027 की जनगणना के बाद होने वाला लोकसभा सीटों का परिसीमन भाजपा के भविष्य को सबसे अधिक प्रभावित करेगा। यदि नई संसद भवन की क्षमता के अनुरूप लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 888 की जाती हैं, तो हिंदी भाषी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 151 और बिहार की 40 से बढ़कर 82 हो सकती हैं। इसे भाजपा के लिए अवसर माना जा रहा है, हालांकि इससे पार्टी पर "उत्तर भारत की पार्टी" होने की धारणा भी मजबूत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि चुनावी गणित से आगे भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व परिवर्तन की होगी। वर्ष 2047 तक नरेंद्र मोदी 96 वर्ष के हो जाएंगे, ऐसे में पार्टी को नई पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करना होगा। उनका मानना है कि भविष्य का नेतृत्व तकनीक आधारित होगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर अधिक केंद्रित रहेगा। संगठनात्मक स्तर पर भी एआई आधारित सदस्यता, बूथ प्रबंधन और डिजिटल वार रूम जैसी व्यवस्थाएं प्रमुख भूमिका निभाएंगी।

डॉ. मलिकराम के अनुसार, 2047 के चुनावों में सबसे प्रभावशाली मतदाता वर्ग जेनरेशन-ज़ेड होगा, जो जाति और धर्म से आगे बढ़कर रोजगार, विकास और पर्यावरण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देगा। इसके साथ ही महिला मतदाताओं की भूमिका भी निर्णायक होगी। परिसीमन के बाद संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक दलों को टिकट वितरण और नीतियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के बीच भाजपा आत्मनिर्भर भारत जैसी आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाएगी। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए कृषि सुधार और हरित ऊर्जा पर विशेष ध्यान देना होगा।

डॉ. मलिकराम ने भाजपा के सामने पांच प्रमुख चुनौतियां भी गिनाईं। इनमें विपक्ष की संभावित एकजुटता, वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी, आर्थिक मंदी का जोखिम, सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और डीपफेक का खतरा तथा परिसीमन के बाद क्षेत्रीय दलों की मजबूती शामिल हैं।

उन्होंने 2047 के लिए तीन संभावित राजनीतिक परिदृश्य बताए। पहला, भाजपा 350 से अधिक सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल करे। दूसरा, क्षेत्रीय दलों के समर्थन से गठबंधन सरकार बने। तीसरा, विपक्ष की वापसी के साथ भाजपा सत्ता से बाहर हो जाए।

डॉ. मलिकराम का निष्कर्ष है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठनात्मक ढांचा और व्यापक कार्यकर्ता नेटवर्क है, जबकि दक्षिण भारत में सीमित जनाधार उसकी प्रमुख कमजोरी बनी हुई है। उनका मानना है कि 2047 की भाजपा आज की तुलना में कहीं अधिक तकनीक आधारित होगी और उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बदलते समय के अनुरूप खुद को कितना ढाल पाती है तथा नई पीढ़ी का विश्वास कितना अर्जित कर पाती है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts