कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट से जुड़ी 19,000 संवेदनशील फाइलें कथित तौर पर लीक, सुरक्षा पर उठे सवाल
नई दिल्ली, 15 जुलाई। तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी लगभग 19,000 संवेदनशील फाइलों के कथित तौर पर लीक होने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय रैनसमवेयर समूह "वर्ल्ड लीक्स" ने डार्क वेब पर इन दस्तावेज़ों के होने का दावा किया है। हालांकि, इस मामले में सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, लीक हुए दस्तावेज़ों में प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 से संबंधित वेंटिलेशन एवं कूलिंग सिस्टम के कथित ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम का फ्लोर लेआउट, सप्लायरों की सूची, वेंडर प्रस्ताव तथा वर्ष 2024 में हुए संयुक्त निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड और उपकरणों की तस्वीरें शामिल बताई गई हैं।
मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संबंधित निजी कंपनी को वर्ष 2018 में कुडनकुलम परियोजना की यूनिट-3 और यूनिट-4 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन एवं निर्माण का अनुबंध मिला था। इन दोनों इकाइयों के वर्ष 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिनसे लगभग 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
जानकारों का मानना है कि यदि ये दस्तावेज़ प्रामाणिक हैं, तो इससे प्लांट की साइबर और भौतिक सुरक्षा पर संभावित जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार लीक हुए दस्तावेज़ न्यूक्लियर रिएक्टर के कोर सिस्टम से संबंधित नहीं हैं, जिनकी आपूर्ति रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम करती है।
गौरतलब है कि "वर्ल्ड लीक्स" नामक रैनसमवेयर समूह पहले भी कई बड़ी कंपनियों को निशाना बना चुका है। यह समूह कथित तौर पर चोरी किए गए डेटा को डार्क वेब पर प्रकाशित करने या फिरौती की मांग करने के लिए जाना जाता है।
फिलहाल इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि डेटा लीक की पुष्टि होती है, तो यह देश के महत्वपूर्ण रणनीतिक ढांचे से जुड़ा एक गंभीर साइबर सुरक्षा मामला माना जाएगा।


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