देश के 18 शहरों में दौड़ेगी वाटर मेट्रो, साकार होगा ‘वाटर मेट्रो मैन’ लोकनाथ बेहरा का विजन
नई दिल्ली। भारत में शहरी परिवहन का नया अध्याय लिखने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। कोच्चि में वाटर मेट्रो की सफलता के बाद अब देश के 18 शहरों में इस मॉडल को विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या, बिहार का पटना, जम्मू-कश्मीर का श्रीनगर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा असम के कई शहर शामिल हैं। इस पहल को भारत में जल-आधारित सार्वजनिक परिवहन की नई क्रांति माना जा रहा है।
देश की पहली वाटर मेट्रो सेवा अप्रैल 2023 में केरल के कोच्चि में शुरू हुई थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रहे लोकनाथ बेहरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी कारण उन्हें "एक्वा मैन ऑफ इंडिया" और "वाटर मेट्रो मैन ऑफ इंडिया" के नाम से पहचान मिली है।
कोच्चि मॉडल बना देश के लिए मिसाल
लोकनाथ बेहरा के नेतृत्व में विकसित कोच्चि वाटर मेट्रो पारंपरिक फेरी सेवा से अलग आधुनिक, इलेक्ट्रिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली है। इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाएं, आधुनिक टर्मिनल, डिजिटल टिकटिंग, मेट्रो रेल से एकीकृत कनेक्टिविटी और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किया गया है।
इस परियोजना ने न केवल सड़क यातायात का दबाव कम किया, बल्कि द्वीपों और जल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए सुरक्षित, तेज और किफायती परिवहन उपलब्ध कराया। साथ ही कार्बन उत्सर्जन और ईंधन की खपत में भी कमी आई।
18 शहरों में विस्तार की तैयारी
केंद्र सरकार अब इस मॉडल को देश के विभिन्न राज्यों में लागू करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। प्रस्तावित शहरों में पटना, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, श्रीनगर, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, तेजपुर सहित कई अन्य शहर शामिल हैं, जहां नदियों, झीलों और जलमार्गों का उपयोग सार्वजनिक परिवहन के रूप में किया जा सकेगा।
पटना में पहले चरण में दीघा घाट से कंगन घाट तक सेवा संचालित करने की योजना है। इसके प्रमुख पड़ाव गांधी घाट और गाय घाट होंगे। प्रारंभिक किराया लगभग 20 रुपये प्रस्तावित है। दूसरे चरण में सेवा का विस्तार दानापुर और सोनपुर तक किया जाएगा।
एक बार में सफर करेंगे 75 यात्री
प्रस्तावित वाटर मेट्रो के इलेक्ट्रिक जहाज लगभग 42 मीटर लंबे और पूर्णतः वातानुकूलित होंगे। इनमें 50 यात्रियों के बैठने तथा 25 यात्रियों के खड़े होकर यात्रा करने की क्षमता होगी। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, एलसीडी डिस्प्ले, साउंड सिस्टम और बड़ी कांच की खिड़कियों जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
प्रधानमंत्री ने भी की सराहना
अप्रैल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोच्चि वाटर मेट्रो का उद्घाटन करते हुए इसे हरित और बहु-माध्यमीय परिवहन प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी विभिन्न राज्यों में इस मॉडल को अपनाने की वकालत कर चुके हैं।
दूरदृष्टि से बदली परिवहन की सोच
1985 बैच के आईपीएस अधिकारी रह चुके लोकनाथ बेहरा का मानना है कि भविष्य का सार्वजनिक परिवहन केवल सड़क या रेल तक सीमित नहीं रह सकता। मेट्रो, बस, जलमार्ग, पैदल यात्री सुविधाओं और साझा टिकटिंग व्यवस्था को एकीकृत कर ही टिकाऊ और प्रभावी शहरी परिवहन विकसित किया जा सकता है। इसी सोच के आधार पर कोच्चि वाटर मेट्रो को विकसित किया गया, जिसे आज देश की प्रस्तावित राष्ट्रीय वाटर मेट्रो नीति का आधार माना जा रहा है।
रोजगार और हरित विकास को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशभर में वाटर मेट्रो नेटवर्क विकसित होता है तो इलेक्ट्रिक नौका निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक टर्मिनल, जलमार्ग इंजीनियरिंग, परियोजना प्रबंधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही यह परियोजना भारत के हरित और टिकाऊ परिवहन तंत्र को नई दिशा देगी।


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