कक्षा 12 की छात्रा श्रेया के गन्ना हार्वेस्टर के डिजाइन को मिला पेटेंट

 किसानों के लिए होगा उपयोगी,मशीन छोटे किसानों के लिए कटाई-सफाई बनाएगी आसान

 मेरठ। कक्षा 12वीं की छात्रा श्रेया सिंह ने कम उम्र में ऐसा नवाचार कर दिखाया है, जो कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दीवान पब्लिक स्कूल की कक्षा 12 की छात्रा श्रेया सिंह को उनके अभिनव कृषि उपकरण ‘टू-वे डी-ट्रैश शुगरकेन मिनी हार्वेस्टर’ के डिजाइन के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट प्राप्त हुआ है।

भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस डिजाइन का पंजीकरण डिजाइन संख्या 490134-001 (क्लास 15-03) के अंतर्गत किया है। यह डिजाइन 10 अप्रैल 2026 को आफिशियल जर्नल आफ द पेटेंट आफिस में प्रकाशित भी हो चुका है। प्रमाणपत्र के अनुसार डिजाइन का पंजीकरण सात फरवरी 2026 को किया गया था।

गन्ना किसानों के लिए उपयोगी तकनीक

श्रेया के अनुसार ‘टू-वे डी-ट्रैश शुगरकेन मिनी हार्वेस्टर’ को विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह मशीन गन्ने की कटाई के साथ उसकी सूखी पत्तियों को दोनों दिशाओं से हटाने में सक्षम है।

इसमें समायोज्य कटाई ऊंचाई, असमतल खेतों में कार्य करने की क्षमता, जाम (ब्लाकेज) पहचान प्रणाली, ओवरलोड सुरक्षा और काम्पैक्ट डिजाइन जैसी आधुनिक तकनीकी विशेषताएं शामिल हैं। इससे गन्ने की कटाई और सफाई का कार्य अधिक तेज, आसान और श्रम लागत कम करने वाला हो सकता है।

वैज्ञानिक पिता का मिला मार्गदर्शन

इस नवाचार को विकसित करने में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विविके सेंटर आफ एक्सीलेंस आन शुगरकेन के प्रभारी एवं सहायक प्रोफेसर डा. विकास कुमार मलिक का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। डा. विकास कुमार श्रेया सिंह के पिता भी हैं। डिजाइन पेटेंट में दोनों का नाम आवेदक के रूप में दर्ज है। श्रेया की माता श्रद्धा मलिक भी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं।

दीवान पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य वीके मिश्रा ने कहा कि श्रेया की उपलब्धि विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। यह साबित करती है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अनुसंधान का अवसर मिले तो वे स्कूली स्तर पर भी राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। विद्यालय में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और शोध संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

प्रेरणा बनेगी यह उपलब्धि

स्कूल के निदेशक एचएम राउत ने कहा कि श्रेया सिंह की यह सफलता युवा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। कृषि नवाचार से जुड़ा यह डिजाइन भविष्य में किसानों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। मेरठ जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र से एक स्कूली छात्रा का राष्ट्रीय स्तर पर डिजाइन पेटेंट हासिल करना शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं का संकेत है।

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