विराेध के बीच  मेडा ने 10 अवैध कोचिंग सैंटर्स कार्रवाई करते हुए किया सील 

 मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने पीएल शर्मा रोड पर बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे अवैध रूप से संचालित कोचिंग सेंटरों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। करीब तीन घंटे चली कार्रवाई में 10 से अधिक कोचिंग सेंटर सील कर दिए गए। इस दौरान बिल्डिंग मालिकों और कोचिंग संचालकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मौके पर हंगामा और जाम की स्थिति बन गई।

एमडीए की जोनल अधिकारी निकिता सिंह, जेई धीरज यादव और विजेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम दोपहर करीब 12:30 बजे पीएल शर्मा रोड पहुंची। कार्रवाई शुरू होते ही कोचिंग सेंटरों में अफरा-तफरी मच गई। जांच के बाद 10 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। यह अभियान लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में चल रही कार्रवाई का हिस्सा है।

कमर्शियल बिल्डिंग होने का दिया तर्क

कार्रवाई का विरोध करते हुए भवन स्वामियों ने कहा कि उनके कॉम्प्लेक्स व्यावसायिक हैं, फिर भी उन पर सील लगा दी गई। इस पर जोनल अधिकारी निकिता सिंह ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक भवन होने के बावजूद कोचिंग संचालन के लिए आवश्यक अनुमति और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। बिना अनुमति संचालित कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

हंगामा, जाम और विरोध प्रदर्शन

सीलिंग अभियान के दौरान बड़ी संख्या में कोचिंग संचालक मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे पीएल शर्मा रोड पर यातायात प्रभावित हुआ और जाम लग गया। संचालकों ने कहा कि वे छात्रों को आईएएस, आईपीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, अपराध नहीं कर रहे हैं। उन्होंने एमडीए पर मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाया।

बाउंसरों से अभद्रता का लगाया आरोप

कोचिंग संचालकों ने आरोप लगाया कि एमडीए ने सीलिंग का स्पष्ट कारण नहीं बताया। उनका यह भी कहना है कि अधिकारियों की मौजूदगी में बाउंसरों ने उनके साथ अभद्रता की। कुछ संचालकों ने दावा किया कि वे कई विभागों को पैसे देते रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी विभाग का नाम नहीं बताया। संचालकों ने मामले की शिकायत मंडलायुक्त और व्यापार मंडल से करने की बात कही।

सुरक्षा मानकों के पालन पर जोर

एमडीए अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए संचालित कोचिंग सेंटरों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। निर्धारित नियमों का पालन करने के बाद ही ऐसे संस्थानों को संचालन की अनुमति दी जाएगी।

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