गंगा नगर थाने का दरोगा 20 हजार रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार
पुलिस लाइन के गेट नम्बर दो से दबोचा, मुकदमें में नाम हटाने के एवज में मांगे थे रूपये
मेरठ। प्रदेश से सरकारी विभागों में भ्रष्ट्राचार समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को एंटी करप्शन की टीम ने मेरठ के गंगा नगर थाने के एक दरोगा को बीस हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथाें गिरफ्तार किया है। दरोगा ने विवेचना की एवज में रिश्वत मांगी थी। पुलिस लाइन के गेट नम्बर दो से दरोगा को गिरफ्तार किया गया। पकड़े दरोगा को सिविल लाइन थाने में ले जाया गया। जहां उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज ेकिया गया है।
दरोगा का नाम प्रकाश चंद है जो वर्तमान में गंगानगर थाने में तैनात चल रहा है। 2 दिन पहले पीड़ित दीपक ने परेशान होने के बाद एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। एंटी करप्शन टीम ने प्रक्रिया का पालन किया और दरोगा को पुलिस लाइन के गेट नंबर 3 के पास से रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया।
993 बैच के दरोगा ने कोडवर्ड में पीड़ित से पैसों की डिमांड की। उसने 2 किलो अनार मांगे। पीड़ित ने जब पूछा, तो दरोगा ने उसे बताया कि अनार महंगा है। 10 हजार रुपए किलो है। बस समझ जाओ। 2 किलो अनार लाने हैं। यही बात पीड़ित ने एंटी करप्शन टीम को बताई।
मुजफ्फरनगर के शामली स्थित गांव घटायन में संगीता परिवार के साथ रहती हैं। कुछ महीने पहले संगीता ने पैसों की तंगी के चलते अपनी एक जमीन का सौदा गंगानगर के रहने वाले अपने रिश्तेदार नमन चौधरी से किया। नमन ने एक महीने में रजिस्ट्री कराने की बात कही।लेकिन, एक महीने में वह रुपए की व्यवस्था नहीं कर पाया। दबाव बना तो उसने सौदा कैंसिल कर दिया और अपना एडवांस का पैसा मांगने लगा।
पैसा नहीं मिलने पर दी मुकदमे की धमकी
संगीता की तरफ से उत्तराखंड के लिब्बाहेड़ी में रहने वाले उनके भांजे दीपक ने नमन चौधरी से बात करने की कोशिश की। लेकिन, नमन ने कुछ भी मानने से मना कर दिया। वह पैसे लौटाने का दबाव बनाने लगा। कई बार वह धमकी भी दे गया। संगीता ने नमन से कहा कि उन्होंने जमीन का सौदा इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें उधारी चुकानी थी। फिर भी नमन नहीं माना।नमन चौधरी का दबाव बढ़ता जा रहा था। इस पर संगीता ने गांव के लोगों की मदद से पंचायत बुलाई। इसमें तय कर दिया गया कि जब संगीता की जमीन बिक जाएगी, तब नमन चौधरी से एडवांस के रूप में लिया गया पैसा लौटा दिया जाएगा। नमन ने भी पंचायत के सामने उस बात को मान लिया और मामला शांत हो गया।
दबिश पड़ी, तो मुकदमे का पता चला
पंचायत होने के बाद सब कुछ शांत हो चुका था, लेकिन नमन शांत नहीं बैठा। उसने मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद 31 मई, 2026 की सुबह करीब 5 बजे गंगानगर थाने में तैनात दरोगा प्रकाश चंद्र पुलिस लेकर संगीता के मुजफ्फरनगर स्थित घर पहुंचा। पूछने पर खुलासा हुआ कि नमन ने पवन कुमार, संगीता और संगीता के बेटे नवनीत के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है।
दरोगा बोला- सच लिखने को पैसे लगेंगे
मुकदमे में पापा पवन कुमार का नाम आने के बाद दीपक ने गंगानगर थाने जाकर दरोगा प्रकाश चंद्र से मुलाकात की। बताया कि यह मुकदमा झूठा दर्ज किया गया है। लेकिन, दरोगा ने कुछ भी मानने से इनकार कर दिया। दीपक ने दरोगा से गुहार लगाई कि वह केवल सच्ची जांच करे। दरोगा ने सच लिखने के लिए 2 लाख रुपए की मांग करनी शुरू कर दी।
दीपक ने किया बारगेनिंग का प्रयास
इसके बाद दरोगा प्रकाश चंद्र से लगभग रोज ही दीपक की बात होने लगी थी। दीपक ने कहा कि वह दो लाख रुपए नहीं दे सकते। इसके बाद दरोगा ने पहले एक लाख रुपए और फिर 50 हजार रुपए मांगने लगा। 23 जून को दीपक ने दोबारा संपर्क किया और कहा कि वह 20 हजार रुपए दे सकता है।30 जून की सुबह दीपक ने दरोगा प्रकाश चंद्र को फोन किया। दरोगा ने उसे पुलिस लाइन के गेट नंबर- 3 पर बुलाया। जैसे ही 20 हजार रुपए दिए, एंटी करप्शन ने उसे दबोच लिया।


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