देश में पेट्रोल-डीजल की राशनिंग शुरू
केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला; रिटेल पंपों से 1 दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल बेचने पर लगी रोक
थोक और रिटेल कीमतों में ₹39.30 प्रति लीटर का अंतर आने से फैक्ट्रियों ने आम पंपों से शुरू की थी खरीद;
आम आदमी पर नहीं पड़ेगा कोई असर, जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
नयी दिल्ली। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर अब भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में देश के भीतर ईंधन की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में 15 मई के बाद से अब तक पेट्रोल की कीमत में लगभग ₹4.75 प्रति लीटर (करीब 5%) और डीजल में ₹4.82 प्रति लीटर (लगभग 5.49%) की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। इसी वैश्विक संकट और घरेलू बाजार में ईंधन के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा नीतिगत आदेश जारी किया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 'मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल (टेंपररी रेगुलेशन ऑफ सप्लाई थ्रू रिटेल आउटलेट्स) ऑर्डर, 2026' के तहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी फैक्ट्री, कमर्शियल संस्थान या बड़ी औद्योगिक इकाइयां आम जनता वाले रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल-पेट्रोल नहीं खरीद सकेंगी। उन्हें अपनी जरूरत का पूरा ईंधन केवल अपने निर्धारित 'कंज्यूमर पंपों' या तय बल्क (थोक) सप्लाई चैनलों से ही उठाना होगा। इसके साथ ही, नए नियमों के तहत पेट्रोल पंप संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी एक ग्राहक या गाड़ी को 1 दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं बेचेंगे। इसके अलावा, आम पेट्रोल पंपों से खरीदे गए डीजल को ड्रमों में भरकर आगे ऊंचे दामों पर दोबारा बेचने (री-सेल) पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह नया नियम फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू किया गया है।
थोक और रिटेल रेट में ₹39.30 का भारी अंतर बनने से सरकार को उठाना पड़ा यह सख्त कदम
इस कड़े प्रतिबंध को लागू करने के पीछे की मुख्य वजह थोक (Bulk) और फुटकर (Retail) कीमतों में आया एक बहुत बड़ा अंतर है। दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार, आम जनता के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है, जबकि उद्योगों और फैक्ट्रियों को थोक में मिलने वाले डीजल की कीमत ₹134.50 प्रति लीटर पहुंच चुकी है। दोनों कीमतों के बीच करीब ₹39.30 प्रति लीटर का सीधा और भारी अंतर आने के कारण बड़े औद्योगिक खरीदारों ने थोक में तेल मंगाना बंद कर दिया था और वे सीधे आम जनता वाले पेट्रोल पंपों पर अपनी गाड़ियां भेजकर सस्ते रेट पर हजारों लीटर तेल की जमाखोरी करने लगे थे। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए तेल की किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा पैदा हो रहा था। इसी दुरुपयोग और डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने 200 लीटर की यह दैनिक सीमा तय की है।
नियम तोड़ने पर 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' के तहत होगी जेल, आम आदमी को घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने साफ किया है कि इस नए नियम से रोजमर्रा में कार, बाइक, ट्रैक्टर या छोटे वाहनों में ईंधन भरवाने वाले आम नागरिकों और किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि एक आम गाड़ी की टंकी वैसे भी 200 लीटर से काफी छोटी होती है। यह आदेश पूरी तरह से बड़े अवैध खरीदारों पर लगाम लगाने के लिए है। सरकार के इन नए नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंपों और खरीदारों के खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' (Essential Commodities Act) और अन्य लागू कानूनों के तहत बेहद सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था की कड़ाई से निगरानी करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारियों, डीएसपी (DSP) रैंक या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों और तेल कंपनियों के सेल्स ऑफिसर्स को औचक छापेमारी, तलाशी और जब्ती के असीमित वैधानिक अधिकार सौंप दिए गए हैं। राज्य सरकारों को भी कालाबाजारी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं।


No comments:
Post a Comment