एआई तकनीक से  स्वतंत्रता आंदोलन की अनसुनी कहानियां फिल्मों के जरिए होंगी जीवंत

- सीसीएसयू में रिसर्च पेपर और थीसिस से बनाईं गईं एआई आधारित फिल्में

- प्रदेश सरकार के बजट से खरीदीं गईं स्क्रीन पर दिखाया जाएगा इतिहास

- आजादी की गौरवगाथा में मेरठ के योगदान पर आधारित रहेंगी फिल्में

मेरठ। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सीसीएसयू के इतिहास विभाग ने एक अनूठी पहल की है। विभाग ने महात्मा गांधी की मेरठ यात्रा, मवाना गोलीकांड और सरधना के भामौरी गांव में अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों को फिल्मों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। इन फिल्मों को विश्वविद्यालय के इतिहास संग्रहालय में आने वाले स्कूली बच्चों और अन्य दर्शकों को दिखाया जाएगा।

इन फिल्मों को दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी बजट से बड़ी स्क्रीन भी खरीदी गई हैं, जिससे दर्शकों को ऐतिहासिक घटनाओं का बेहतर अनुभव मिल सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ’’योगी सरकार’’ की ओर से शिक्षा और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में मिल रहे सहयोग से इस तरह की डिजिटल पहल को गति मिली है। इन फिल्मों का आधार मेरठ के स्वतंत्रता आंदोलन की उन गौरवगाथाओं को बनाया गया, जिन पर छात्र शोध कर चुके हैं। इसके साथ ही फिल्मों के कथनक में शोधार्थियों तथा प्रोफेसर के उन रिसर्च पेपर्स को भी शामिल किया गया है, जो नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं।   

1920 में मेरठ पहुंचे थे महात्मा गांधी

इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि महात्मा गांधी वर्ष 1920 में मेरठ पहुंचे थे, जहां उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिला था। उस समय गांधी जी के स्वागत में भारी जनसमूह उमड़ा था। स्वयं महात्मा गांधी ने भी अपने संस्मरणों में मेरठ यात्रा का उल्लेख किया है। अब इस ऐतिहासिक यात्रा और उससे जुड़े दृश्यों को फिल्म के रूप में तैयार कर लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

मवाना गोलीकांड और भामौरी कांड को भी किया गया शामिल

फिल्मों में 16 अगस्त 1942 को मवाना में ब्रिटिश सैनिकों द्वारा किए गए गोलीकांड और 18 अगस्त 1942 को सरधना के भामौरी गांव में अंग्रेज सैनिकों द्वारा ग्रामीणों पर की गई गोलीबारी की घटनाओं को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है। इन दोनों घटनाओं में अनेक ग्रामीण शहीद हुए थे। विश्वविद्यालय ने इन घटनाओं पर अलग-अलग फिल्में तैयार कर उनके ऐतिहासिक महत्व को सामने लाने का प्रयास किया है।

एआई तकनीक से तैयार हुईं फिल्में

इन तीनों फिल्मों को ’’आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)’’ तकनीक की सहायता से तैयार किया गया है। इतिहास विभाग का उद्देश्य लिखित सामग्री से आगे बढ़ते हुए इतिहास को दृश्य माध्यम में प्रस्तुत करना है, ताकि युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चे स्वतंत्रता आंदोलन की इन महत्वपूर्ण घटनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।

डिजिटल हुआ स्वतंत्रता आंदोलन का संग्रहालय

प्रो. कृष्णकांत शर्मा के अनुसार, विश्वविद्यालय का संग्रहालय मेरठ के स्वतंत्रता आंदोलन पर केंद्रित है और इसे पूरी तरह डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया है। संग्रहालय में उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों को डिजिटली अपग्रेड किया गया है, जिसमें फिल्मों को भी शामिल किया गया है। इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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