योग बनाए निरोग

 इलमा अज़ीम 

 आज भागती दौड़ती दिनचर्या में समय का बहुत अभाव है। ऐसे में हमारे शरीर की फिटनेस के लिए योग जैसा कार्यक्रम चाहिए जो कम समय में बिना कोई धन खर्च किए आसानी से उपलब्ध हो।  आज जब मनुष्य के पास हर सुख सुविधा आसानी से उपलब्ध है, मगर समय का अभाव सबके सामने है, ऐसे में फिटनेस को बनाए रखने के लिए योग सबसे बढिय़ा है जो प्रतिदिन आधा घंटा देकर उत्तम स्वास्थ्य दे सकता है।  

शहर तो शहर, ग्रामीण परिवेश में भी दैनिक जीवन की भौतिक सुख-सुविधाओं का विकास तो हुआ है, मगर इस सबसे मानव फिटनेस में काफी कमी आई है। हमारा पैदल चलना अब बहुत कम हो गया है। रक्त वाहन करने वाली शिराओं के लिए कोई भी कार्यक्रम नहीं है जो उन्हें ठीक रख सके। इसलिए अच्छे फिटनेस कार्यक्रम की जरूरत भी महसूस हो रही है। स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। बिना अच्छे स्वास्थ्य के धन दौलत, पद प्रतिष्ठा व अन्य भौतिक सुख सुविधाएं सब बेमानी लगती हैं। वर्तमान जीवन शैली के कारण मनुष्य के पास अपने स्वास्थ्य के लिए कोई भी कार्यक्रम नहीं है जो उनके स्वास्थ्य को सुधार कर व्यवस्थित रख सके। 

समय बचाती दुनिया के लिए योग मुख्य विकल्प है, जो कम श्रम कर अधिक फिटनेस दे सकता है। इसलिए अब आम जनमानस के लिए योग के बारे में जानना जरूरी हो जाता है। सैकड़ों वर्ष पूर्व महर्षि पतंजलि ने योग को लिखित रूप में संग्रहित किया और योग सूत्र की रचना की। योग सूत्र की रचना के कारण पतंजलि को योग का जनक कहा जाता है। 

इस योग के महान ग्रंथ में योग के बारे में कहा गया है कि मन की वृत्तियों पर नियंत्रण करना ही योग है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि, यह अष्टांग योग के आठ सूत्र हैं। आठों अंगों में प्रथम दो यम व नियम को नैतिक अनुशासन, आसन, प्राणायाम व प्रत्याहार को शारीरिक अनुशासन व धारणा, ध्यान, समाधि को मानसिक अनुशासन बताया गया है।  हजारों साल पहले भारतीय शोधकर्ताओं ने योग की क्रियाओं से होने वाले लाभों को समझ लिया था जो आज की चिकित्सा व खेल विज्ञान में योग का प्रयोग खूब हो रहा है।

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